सम्पूर्ण भारत, अररिया।
पर्यवेक्षण गृह, अररिया के प्रांगण में आज जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक के मार्गदर्शन में यूनिसेफ बिहार, बिहार इंटर एजेंसी ग्रुप एवं जीपीएसवीएस के संयुक्त तत्वावधान में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यवेक्षण गृह के बच्चों एवं पदाधिकारियों को बाढ़ पूर्व तैयारी, डूबने से बचाव, वज्रपात से सुरक्षा एवं सर्पदंश प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह अधीक्षक अमरजीत कुमार ने कहा कि अररिया में प्राकृतिक एवं मौसमी आपदाओं का प्रभाव काफी तीव्र रहता है। आपसी सहयोग, समन्वय एवं जनजागरूकता के माध्यम से आपदाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चे एक संवेदनशील एवं नाजुक समूह हैं, इसलिए सामान्य दिनों के अलावा आपदा के दौरान बच्चों की विशेष देखरेख एवं सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
जिला सलाहकार श्री कमल कामत ने बाढ़ पूर्व तैयारी, डूबने से बचाव, वज्रपात से सुरक्षा तथा सर्पदंश की स्थिति में अपनाए जाने वाले सुरक्षित एवं प्राथमिक प्रबंधन उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने आपदा के दौरान बच्चों की सुरक्षा, सुरक्षित स्थान पर जाने तथा समय पर सहायता प्राप्त करने के महत्व पर भी जानकारी दिए।
प्रखंड समन्वयक श्री प्रमोद कुमार कर्मकार द्वारा मॉकड्रिल के माध्यम से आपदा की स्थिति में अपनाए जाने वाले विभिन्न जीवनरक्षक कौशल एवं व्यवहारिक उपायों का प्रदर्शन किया गया। बच्चों एवं कर्मियों को आपात स्थिति में शांत रहने, सुरक्षित स्थान की पहचान करने तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सहायता लेने के बारे में भी बताया गया।
बताया गया कि प्रत्येक आपदा के दौरान साहस, संयम एवं सहयोग आवश्यक है। आपदा से संबंधित पूर्व चेतावनी को गंभीरता से समझें और उसका पालन करें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।कार्यक्रम में पर्यवेक्षण गृह के बच्चों एवं कर्मी उपस्थित थे।


















