<img class="alignnone size-medium wp-image-29305" src="http://najarianews.in/wp-content/uploads/2026/08/IMG_20260808_102800-300x290.jpg" alt="*अध्यात्म* : आत्मा के आह्वान पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का पद छोड़कर फल त्याग का अद्वितीय उदाहरण 21वीं शताब्दी के तीसरे दशक के वर्ष 2026 में प्रस्तुत किया है। महाभारत युग में भगवान श्री कृष्ण की शरण में आकर अर्जुन ने राजनीतिक सत्ता के विषय में कहा: *मेरी मानसिक स्थिति भीख मांगकर इच्छाओं की पूर्ति करने वाले भिखारी से भी बदतर हो गई हैं। समस्त इंद्रियां आपके प्रेम के लिए तड़प रही हैं...*भागवत गीता, अध्याय -2, श्लोक -8* "न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद् यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम्.अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धं राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् ॥ 8॥ *विवेचना:* धन, संपत्ति, ऐश्वर्य, पद, प्रतिष्ठा और सांसारिक सत्ता प्रेम,शांति,स्वाद, नींद से मैं निर्धन हो गया हूं ... *दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज 24अगस्त 2026।* अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण कहा: मुझे ऐसा कोई साधन नहीं दिखता जो इंद्रियों को भिखारी बनाने वाली इच्छाओं का विनाश कर सकें! स्वर्ग पर देवताओं के आधिपत्य की तरह इस धन-धान्य संपन्न पृथ्वी पर निष्कंटक राज्य प्राप्त करने पर भी इंद्रियां कर्तव्य पूरा करने की प्रेरणा मुझे नहीं दे रही हैं। *अर्थात* , अर्जुन सरीखे राजनीतिज्ञों के तथाकथित ज्ञान से देश की समस्याओं को हल नहीं निकलेगा। शैक्षिक ज्ञान, विद्वता, उच्च पद को राष्ट्रप्रेम की तब मिलेगी - विधायिका, न्यापालिका तथा कार्यपालिका के शीर्ष पदों पर संविधान से प्रेम करने वाले ज्ञानी विराजमान होंगे। संविधान को ही राष्ट्र मानेंगे! बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आत्मा के कहने पर मुख्यमंत्री का पद छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण का परामर्श- "फल त्याग" या निष्काम कर्म का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।" width="300" height="290" />