नजरिया न्यूज। भरगामा।
“अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है ” के भजन से मंगलवार को आदर्श मध्य विधालय के प्रागण मे बने विशाल पंडाल गूंज रहा था। मौका था श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्ररवचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रसंग वर्णन का। मुख्य प्रवचनकर्ता वृदावन मथुरा से पधारे सर्वधर्म समन्वय सनातन भागवत के संस्थापक सरल संत श्री नारायण जी महाराज (राधेय) ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा प्रसंग का वर्णन कर रहे थे। कथा सुनाते हुए संत ने बहुत बारिक से श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रसंगों को शब्दों में वर्णन किया। कथा सुनने आए श्रद्धालुओं ने बड़े गौर से इस वर्णन को सुना। कथा रसपान करने आए श्रद्धालु कृष्ण की भक्ति में गोता लगा रहे थे। वहीं कथा करते उन्होने कहा श्रीमद् भागवत कथा जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली सर्वोतम कथा है। इसमे तीनो कथा यथा भागवत कथा , राम कथा व शिव कथा मिला हुआ है । इसलिए कथा में हिस्सा लेने वाले सभी श्रद्धालु पुण्य के भागी बनते हैं। इससे सुनने मात्र से पापों का नाश हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिस नगरी में श्रीमद् भागवत कथा की जाती है वह भगवान नारायण स्वयं कथा सुनने पहुचते है। इसलिए वह नगरी गवान की नगरी हो जाती है । श्रीमद् भागवत कथा सुनने से वैराग और भक्ति आती है। जिस प्रकार बीमार आदमी को दवा की जरूरत होती है उसी तरह श्रीमद् भागवत इंसान की मूल जरुरत है। इसे सुनने से कोई तुम्हारा वुरा नही कर सकता , दूसरा तुम किसी का वुरा नही कर सकते । श्रीमद् भागवत परम सत्य की अनुभूति व काल के भय से मुक्त कराता है। इससे मनुष्य ईश्वर से साक्षात्कार कर सकता है। कहा कि श्रद्धा से ही विश्वास अर्जित होता है। श्रद्धा को पाने व विश्वास को मजबूत करने के लिए संत का शरण आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मानव के पास सभी संसारिक सुख साधन रहने के बावजूद भक्ति भावना के अभाव में उसका जीवन निरर्थक हो जाता है।उन्होने कहा ईश्वर का स्वरुप प्रेम है। प्रेम से ही ईश्वर की पूजा की जा सकती है। प्रेम ही भक्ति है। हमारे देश में बड़े- बड़े संतों ने प्रेम से ही ईश्वर को पाया है। मीरा बाई ने प्रेम से ही ईश्वर को पाया और अनंत चेतना में लीन हो गए। श्री कृष्ण को प्रेम भाव से ही गोपियों ने पाया और उन्हें रासलीला में प्रवेश मिला, यानि आत्म ज्ञान में स्थित हो गईं । कहा ऐसे ही हम मनुष्यों को भक्त बन कर ईश्वर से प्रेम करना चाहिए। क्योंकि आलौकिक प्रेम ईश्वर से ही हो सकता है।





















