=सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ के विवादों में रहे मेयर चुनाव को लेकर सोमवार को अहम आदेश दिया…
=कोर्ट ने सोमवार की सुनवाई के दौरान चुनाव के पीठासीन अधिकारी रहे अनिल मसीह से कड़े सवाल पूछे…
=अदालत ने मंगलवार को होने वाली सुनवाई के दौरान सारे बैलट पेपर पेश करने का आदेश दिया है…
=अनिल मसीह ने कोर्ट में माना कि उन्होंने बैलेट पेपर क्रॉस (‘X’) का निशान बना दिया था..
सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच कर रही है…
सुप्रीम कोर्ट ने पांच फरवरी को हुई सुनवाई में रिटर्निंग ऑफ़िसर (अनिल मसीह) को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी…
*दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी, नजरिया न्यूज,20 फरवरी।*
संविधान में लोकतंत्र की रक्षा करने की शक्ति है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव में धांधली के मामले की सुनवाई में भारतीय संविधान की शक्ति सिर चढ़कर बोल रही थी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और अन्य जजेज चंडीगढ़ मेयर सुनव मामले की सुनवाई कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि इस मामले में रिटर्निंग आफिसर की नियुक्ति करने वाले चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर तक चुप थे। इसके बावजूद सच्चाई संविधान की शक्ति के चलते सामने आई है। सोशल मीडिया की एक रिपोर्ट:
सोमवार को कठघरे में रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह खड़े थे। अदालत में क्या हुआ:
चीफ जस्टिस चंदूचूड़ का सवाल: मैंने तुम्हारा वीडियो देखा। तुम वैलेट पेपर पर क्रास मार्क लगा रहे हो। क्या तुमने क्रास मार्क लगाए थे?
पहले तो अनिल मसीह साहब आनाकानी करने लगे। फिर चीफ जस्टिस डीवाई चंदूचूड़ ने कहा:
आप जो बोल रहे हैं, एक-एक चीज मैं नोट कर रहा हूं। एक भी शब्द झूठ बोला तो कानूनी कार्रवाई होगी! सारे साबूत मेरे पास हैं!
रिटर्निंग आफिसर अनिल मसीह का जमीर जाग गया या डर उन्हें लगने लगा। एकदम से घबरा गए।
उन्होंने कहा:
हां साहब! हमने क्रास लगाए थे। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा: कितने बैलेट पेपर पर क्रास निशान लगाए थे? मसीह साहब ने कहा: आठ बैलेट पेपर पर!तब डीवाई चंद्रचूड़ साहब ने आखिरी वाक़्य कहा; तुम पर मुकदमा चलना चाहिए। तुम कहीं ना कहीं लोकतंत्र के हत्यारे हो!
*कोट:*
चंडीगढ़ केंद्र शासित राज्य है। दिल्ली सरकार चंडीगढ़ प्रशासन की मालिक है। गवर्नर और डिप्टी कमिश्नर की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। मैं सारा खेल बेहद शर्मनाक है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ साहब ने इसे पकड़ लिया।
*वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा, एडमिन*
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*कोट;*
अनिल मसीह को रिटर्निंग आफिसर बनाना असंवैधानिक था। किसी राजनीतिक दल या संगठन के पदाधिकारी को मेयर चुनाव का रिटर्निंग आफिसर नहीं बनाया जा सकता। अनिल मसीह भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं। रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति डिप्टी कमिश्नर गृह मंत्रालय की अनुमति से करते हैं।
*अनिल शुक्ला, खोजी पत्रकार चंडीगढ़*
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एक डंकी पिक्चर आई थी। इसमें इल्लीगल तरीके से लोगों को विदेश कैसे भेजें जाते हैं, उस पर आधारित थी। ऐसा ही चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हुआ। यह भविष्य का एक ट्रेलर था। एक ही लक्ष्य है चुनाव हारते हैं या जीतते हैं, सत्ता में बने रहने हैं।
*वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े*





















