नजरिया न्यूज (अररिया) बिहार।
2.600 KM लंबी पीसीसी ढलाई सड़क जगह–जगह से टूट चुकी थी। दरारें, उखड़ी सतह और गड्ढों से लोग परेशान थे। अब उसी सड़क पर मेंटेनेंस के नाम पर अलकतरा-गिट्टी की पतली काली परत चढ़ाई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पीसीसी सड़क के अनुरक्षण में इस तरह ब्लैकटॉप की पतली लेयर डालने का तकनीकी प्रावधान है? या फिर यह सिर्फ अस्थायी मरम्मत है?
जानकार बताते हैं कि कंक्रीट सड़क और अलकतरा सड़क की संरचना अलग होती है। अगर पीसीसी सड़क क्षतिग्रस्त होती है तो सामान्य प्रक्रिया कंक्रीट पैचिंग या पुनः ढलाई की होती है। ऐसे में सीधे ऊपर पतली बिटुमिनस परत डालना तकनीकी स्वीकृति और विशेष प्रक्रिया मांगता है।
ग्रामीणों की मांग है कि विभाग साफ करे—
क्या यह कार्य नियम के तहत हो रहा है?
कितनी मोटाई की परत डाली जा रही है?
मेंटेनेंस मद से कितना खर्च हो रहा है?
जनता के पैसे से बनी सड़क है, तो जवाब भी जनता को मिलना चाहिए। अररिया में यह मामला अब पारदर्शिता की कसौटी बन चुका है।























