– अब कविलसा में ‘तारी का पैर’ से फिर हलचल। रानीगंज, अररिया में सनसनी।
नजरिया न्यूज (अररिया) – बिहार।
रानीगंज के कविलसा में रेलवे पिलर की खुदाई के दौरान 70 फीट नीचे से निकले ‘तारी के पैर’ जैसे ढांचे ने इतिहास की याद ताज़ा कर दी है। करीब 100 साल पहले भी रेलवे लाइन बिछाने के दौरान ही एक ऐसी खोज हुई थी, जिसने दुनिया को चौंका दिया—वह थी सिंधु घाटी सभ्यता की परतें।
तब पंजाब के हड़प्पा इलाके में रेल पटरी के लिए खुदाई के समय प्राचीन ईंटें मिलीं। बाद में पुरातत्व विभाग की जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण ढांचा नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी विकसित नगरीय सभ्यता के अवशेष थे। 1921–22 में हुई उस खोज ने इतिहास की किताबें बदल दीं।
अब सवाल कविलसा में उठ रहा है—क्या रेलवे खुदाई एक बार फिर किसी दबे राज़ की दस्तक है?
स्थानीय लोग कह रहे हैं, “जब 100 साल पहले पटरी ने सभ्यता उजागर कर दी, तो आज निकला यह ढांचा क्या इशारा कर रहा है?”
फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन मांग तेज है कि विशेषज्ञों को बुलाकर वैज्ञानिक जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि यह सिर्फ धातु/संरचनात्मक हिस्सा है या किसी पुराने निर्माण का अवशेष।
इतिहास गवाह है—कभी-कभी विकास की खुदाई, अतीत का दरवाज़ा खोल देती है।























