= स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों में कहा गया है कि किसानों को उनकी फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिया जाए
दुर्केश सिंह, संपादकीय, प्रभारी नजरिया न्यूज, उतर प्रदेश, 12जनवरी।
कृषि कानूनों के रद्द होने के बाद किसानों ने भी अपना आंंदोलन वापस ले लिया था।उस दौरान सरकार ने उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने का वादा किया था। इसके साथ ही उनकी कुछ और मांगों को भी पूरा करने का वादा किया गया था।
किसान अब इन मांगों को मानने के लिए दबाव बनाने की तैयारी में हैं।13 फरवरी का ‘दिल्ली चलो’ का नारा उनकी इसी रणनीति का हिस्सा है।
अपने एक साल के लंबे आंदोलन की बदौलत नरेंद्र मोदी सरकार से कृषि कानूनों को निरस्त करवाने में कामयाब रहे किसानों ने एक बार फिर अपनी मांगों के समर्थन में मैदान में उतरने की तैयारी कर ली है।
किसानों के दो बड़े संगठनों, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनैतिक) और किसान मज़दूर मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर 13 फरवरी को ‘दिल्ली कूच’ का नारा दिया है।
वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने 16 फरवरी को एक दिन का ग्रामीण भारत बंद करने का आह्वान किया है।
दो साल पहले दिल्ली के बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों का आंदोलन इतना मुखर था कि नरेंद्र मोदी सरकार को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून -2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तुएं संशोधन अधिनियम 2020 को रद्द करना पड़ा था।
किसानों को डर था कि सरकार इन कानूनों के ज़रिये कुछ चुनिंदा फसलों पर मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का नियम खत्म कर सकती है और खेती-किसानी के कॉरपोरेटीकरण को बढ़ावा दे सकती है।इसके बाद उन्हें बड़ी एग्री-कमोडिटी कंपनियों का मोहताज होना पड़ेगा।
संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने मीडिया से कहा:
हमने अपनी मांगें मनवाने के लिए ‘दिल्ली चलो’ का नारा नहीं दिया है।हम सरकार से सिर्फ यही मांग कर रहे हैं कि दो साल किसानों का आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए सरकार ने जो वादे किए थे उन्हें वो पूरा करे।
डल्लेवाल ने कहा:
सरकार ने उस समय न्यूनतम समर्थन मूल्य को गारंटी का वादा किया था।इसके साथ ही उसने कहा था किसान आंदोलन के समय किसानों के ख़िलाफ़ जो मुकदमे किए गए थे वे वापस लिए जाएंगे। साथ ही लखीमपुर-खीरी की घटना में मारे गए लोगों को परिवारों को नौकरी और घायलों को दस-दस लाख रुपये दिए जाएंगे।
2021 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुरी खीरी में सरकार के कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे चार सिख किसानों को कथित तौर पर गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की एसयूवी ने कुचल डाला था।
डल्लेवाल ने कहा कि सरकार ने कहा था कि किसानों को प्रदूषण कानून से मुक्त रखा जाएगा। सबसे बड़ा वादा ये किया गया था कि किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक़ फसल के दाम दिए जाएंगे। लेकिन इनमें से कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों में कहा गया है कि किसानों को उनकी फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिया जाए





















