कटिहार जिला प्रभारी राजकुमार
बारसोई प्रखंड के बेलवा गांव में स्थित अति प्राचीन सरस्वती स्थान जोकि बेलवा सरस्वती स्थान के नाम से प्रसिद्ध है। अब जगन्नाथ सरस्वती धाम में तब्दील हो गया है। बता दें कि लगभग 2 वर्ष पहले ही यहां के स्थानीय मंदिर कमेटी के लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक संस्था, अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण वचानामृत संघ (इस्कॉन) के हाथों में सौंप दिया है। तब से मंदिर से सटे सामुदायिक भवन में इस्कॉन के द्वारा भेजे गए पुजारी यहां रहते हैं। और प्रत्येक दिन देवी देवताओं की सेवा करते हैं। बताते चलें कि माता सरस्वती के संगमरमर की प्रतिमा के बगल में ही भगवान जगन्नाथ स्वामी के कास्ट की प्रतिमाएं स्थापित की गई है। और सभी देवी देवताओं की सुबह-शाम एक साथ पूजा होती है। पहले मंदिर के आसपास कोई नहीं रहता था सेवा करने वाले पुजारी लगभग एक डेढ़ किलोमीटर दूर बस्ती में निवास करते हैं। वहां से भोग लगाने और आरती करने के लिए आया करते थे। परंतु अब माता के सेवक यहीं रहकर सुबह-शाम पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर कमेटी के लोगों के अनुसार हम लोग प्रत्येक दिन की पूजा पाठ में अधिक समय नहीं दे पा रहे थे। तथा इसमें होने वाले खर्च के लिए लोगों से चंदा इकट्ठा करने में भी परेशानी हो रही थी। हम लोगों के पास समय का अभाव रहने के चलते उक्त अंतरराष्ट्रीय संस्था को माता की सेवा की जिम्मेदारी दे दी गई है। बताते चलें कि यहां सालों भर माता की पूजा होती है।
यहां माता काली, लक्ष्मी और सरस्वती की मिलौनी रूप नील सरस्वती माता की बड़ी महिमा है। कहा जाता है कि महाकवि कालिदास ने यहीं साधना की थी और साधना करके माता का साक्षात्कार किया था। उसके उपरांत यहां से बौद्धिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन जाकर विख्यात हुए। वहीं यहां की सदियों पुरानी परंपरा है कि यहां धरना दिया जाता है। मंदिर के प्रांगण में कोई भी श्रद्धालु आकर सो जाता है और अपना शुद-बूध गवा देता है। 3 दिन से लेकर 10 दिनों तक बिना कुछ खाए पिए बेहोशी कि अवस्था में माता के मंदिर में पड़े रहने के उपरांत जब उन्हें होश आता है तब वह काफी तरो- ताजा महसूस करता है। और हंसते मुस्कुराते अपने घर को जाता है। वही धरना देने वाले श्रद्धालु अक्सर यही कहते सुने गए हैं की माता ने उनकी प्रार्थना सुन ली है। ऐसा कहा जाता है कि जिन लोगों ने भी यहां धरना दिया उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इसलिए गाहे-गवाहे वर्ष में दो 4 श्रद्धालु धरना देते नजर आ ही जाते हैं।





















