आगामी 18 फरवरी यानी रविवार से बारसोई बाजार स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर सह ठाकुरबाड़ी में मंदिर भवन के जीर्णोद्धार के उपरांत नई प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पांच दिवसीय उत्सव कार्यक्रम का आयोजन बारसोई नगर वासी के सहयोग से मंदिर कमेटी के द्वारा किया गया है।बताते चलें कि एक साथ तीन नए मंदिर बनाए गए हैं जिसमें अलग-अलग देवताओं की संगमरमर पत्थर की स्थापना कि जाएगी। दक्षिण दिशा से शुरुआत करें तो पहले राम भक्त हनुमान जी मंदिर के गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा होगी, वहीं ठाकुरबाड़ी के मुख्य मंदिर जो की बीच में स्थित है राधे श्याम स्वामी युगुलेश्वर भगवान की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी उसके बाद उत्तरी छोर पर बने शिवालय में पूरे परिवार के साथ भगवान शंकर बिराजें। बता दें कि प्राण प्रतिष्ठा के लिए राजस्थान से संगमरमर की मूर्ति मंगा ली गई है। उत्सव के लिए तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इस विषय में मंदिर कमेटी के सदस्य मिट्ठू साह ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में देश के प्रसिद्ध धर्म स्थानों से आधा दर्जन से अधिक पंडित मांगे जाएंगे तथा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम सम्पन्न होगा।तथा मंदिर के पुजारी रमेश आचार्य उक्त उत्सव समारोह के मुख्य पुजारी होंगे। ज्ञात हो कि उक्त कार्यक्रम के प्रथम दिन रविवार को पूरे नगर में सैकड़ो महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकल जाएगी उसके उपरांत सभी नगर वासियों के बीच
भगवान की चरणों में लगाया हुआ महा प्रसाद वितरण किया जाएगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए मंदिर कमेटी के सदस्य अजय साहा ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह एवं पांच दिवसीय कार्यक्रम के अनुसार 18 फरवरी रविवार को कलश शोभा यात्रा, भंडारा, व जिलाधिवास। 19 फरवरी को आवाहन, पूजन, हवन, व अन्नाधिवास। 20 फरवरी को देव पूजन, जप, पाठ, हवन व फलाधिवास। 21 फरवरी को देव स्नान, पूजन, हवन, शैय्याधिवास। तथा 22 फरवरी गुरुवार को पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, हवन व भंडारा। का कार्यक्रम रखा गया है। इस संबंध में मंदिर के पुजारी रमेश आचार्य ने कहा कि लंबे अरसे के इंतजार के बाद भगवान अपने नए घर में जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग 10 वर्ष से भगवान टूटे मरैया में रहते थे। वहां उनको भोग,राग करने में काफी कठिनाई होती थी। परंतु अब जब भगवान नए मंदिर में चले जाएंगे तो सारी समस्याएं दूर हो जाएगी। वहीं इस संबंध में मंदिर के सदस्य वीरेंद्र साह ने कहा कि अभी मंदिर पूरी तरह से नहीं बना है। परंतु गर्भगृह का निर्माण हो गया है। पुजारी और श्रद्धालुओं की असुविधा को देखते हुए हम लोगों नए बने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कर हैं जल्द ही मंदिर के कार्य को पूर्ण कर लिया जाएगा। बताते चलें कि नया मंदिर बनाने के लिए पुराने मंदिर को तोड़कर हटा दिया गया था और उसी स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। इसलिए भगवान की मूर्ति को कच्चे घर में रखा गया है वहीं उनका पूजन हो रहा है।
ईद व रामनवमी को लेकर फारबिसगंज में शांति समिति की बैठक, प्रशासन ने दिए कड़े निर्देश
नजरिया न्यूज़, फारबिसगंज/अररिया। आगामी ईद और रामनवमी शोभायात्रा को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से मंगलवार...





















