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पहले वित्त मंत्री और बाद में प्रधानमंत्री बने मनमोहन सिंह की राज्यसभा से विदाई के मौक़े पर गुरुवार को नेताओं ने उनके योगदान को याद किया
प्रतिभा सिंह, नजरिया न्यूज संवाददाता, नई दिल्ली , 09फरवरी।
पहले वित्त मंत्री और बाद में प्रधानमंत्री बने मनमोहन सिंह की राज्यसभा से विदाई के मौक़े पर गुरुवार को नेताओं ने उनके योगदान को याद किया.
इस दौरान सांसदों ने भारत की अर्थव्यवस्था में मनमोहन सिंह के योगदान को याद किया और कहा कि ईमानदारी और सच्चाई उनका मूल गुण रहा था. मनमोहन सिंह अब 91 साल के हो चुके हैं.
पीएम मोदी ने भी मनमोहन सिंह की जमकर प्रशंसा की. मोदी की प्रशंसा को भारत के प्रमुख अख़बारों ने प्रमुखता से जगह दी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मनमोहन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा, “वो छह बार सासंद रहे, उन्होंने लीडर ऑफ़ द हाउस और विपक्ष के नेता के तौर पर सदन के कामकाज़ में अमूल्य योगदान दिया।
कहा जाता है।उन्होंने भारत के कई सेक्टर को विदेशी निवेश के लिए खोल दिया और व्यापार को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देनी शुरू की।
मनमोहन सिंह का कार्यकाल
साल 2004 से लेकर 2014 तक प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह के कार्यकाल में खाद्य सुरक्षा और ग़रीबी उन्मूलन से लेकर शिक्षा और सरकारी कामकाज़ में पारदर्शिता से जुड़े कई अधिकार-आधारित क़ानून बने।
इन क़ानूनों में शामिल हैं:
शिक्षा का अधिकार जिसने 6 से 14 साल के हर बच्चे के लिए शिक्षा को उसका मौलिक अधिकार बनाया।
सूचना का अधिकार जिसने सूचना तक हर नागरिक की पहुंच को उसका हक़ बनाया और इसे सुनिश्चित किया।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा क़ानून जिसकेे तहत देश के दो तिहाई परिवारों को सब्सिडी में खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया।
भूमि अधिग्रहण क़ानून जिसके ज़रिए उन लोगों के लिए उचित मुआवज़ा तय किया गया, जिनकी ज़मीनों का अधिग्रहण विकास कार्य के लिए किया गया।
वन अधिकार क़ानून जिसके तहत आदिवासी को ज़मीन के रिकॉर्ड दिए गए।
मनरेगा क़ानून जिसके ज़रिए प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल5 में कम से कम 100 दिनों के लिए रोज़गार दने की व्यवस्था की गई।
तीन जनवरी 2014 को आयोजित अपनी आख़िरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनमोहन सिंह ने अमेरिका के साथ परमाणु क़रार की घोषणा की थी।
उन्होंने इसे अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया था। इस क़रार के ज़रिए ये सुनिश्चित हुआ कि भारत परमाणु ईंधन ख़रीद सकता है और अपने परमाणु संयंत्रों के लिए ईंधन तकनीक भी हासिल कर सकता है।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनमोहन सिंह ने ख़ुद की आलोचना को लेकर कहा था कि उन्हें “कमज़ोर प्रधानमंत्री” कहा जाता है लेकिन “मीडिया की तुलना में इतिहास उनके प्रति अधिक उदार रहेगा।
1980 के दशक में मनमोहन सिंह भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे। 1991 में वो राज्यसभा में आए थे. 1998 से 2004 के बीच वो विपक्ष के नेता रहे।
1991 से लेकर 1996 तक पीवी नरसिम्हा के कार्यकाल में मनमोह सिंह वित्त मंत्री के पद पर रहे।
इस दौरान उन्होंने आर्थिक सुधारों की पहल की इसी कारण उन्हें आर्थिक उदारीकरण का शिल्पकार कहा जाता है. उन्होंने भारत के कई सेक्टर को विदेशी निवेश के लिए खोल दिया और व्यापार को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देनी शुरू की।





















