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आपातकाल के दौरान जब इंदिरा गांधी ने दो महारानियों को जेल में डाला था: विवेचना
कोट:
लोकसभा चुनाव 2024के पहले प्रधानमंत्री मोदी के अंतिम भाषण का एक अंश:
प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी ने कहा: अगर किसी परिवार में अपने बलबूते पर, जनसमर्थन से, एक से अधिक लोग राजनीतिक क्षेत्र में प्रगति करते हैं तो उसे हमने परिवारवाद नहीं कहा। हम परिवारवाद उसे कहते हैं जब परिवार पार्टी चलाता है, परिवार के लोगों को प्राथमिकता देता है, सारे निर्णय परिवार के लोग करते हैं, वो परिवारवाद है।
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी, नजरिया न्यूज, 07फरवरी।
मुख्यमंत्री दिल्ली केजरीवाल के निजी सचिव और दिल्ली जल विभाग के एक अभियंता के घर पर ईडी ने छापामारी की। दोनों को सरकारी गवाह बनाकर ईडी मुकदमा दर्ज करना चाहती है। जिस मामले में ईडी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पूछताछ कर रही थी, उस मामले में ऐसा कुछ नहीं मिला जिसमें ईडी केजरीवाल को गिरफतार कर सके। ऐसी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है।सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा हो रही है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सेईडी की पूछताछ के सारे रिकॉर्ड को डिलीट कर दिया गया है।
डेढ़ महीने बाद महाचुनाव होना है। सोशल मीडिया का एक धड़ा की सोच है : लोकसभा चुनाव 2024 ईडी बनाम विपक्ष होने जा रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नजदीक रहने वालों पर भी ईडी ने छापामारी की थी।उसके बाद राजद और जदयू सरकार का गठबंधन टूट गया। अरविंद केजरीवाल के ट्रेजरार और पर्सनल सेक्रेटरी विभव कुमार और एनडी गुप्ता की छह फरवरी की सुबह घेराबंदी की गई। दोनो का बयान लिया गया। सोशल मीडिया का मानना है कि दोनों के बयान के आधार पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर ईडी मुकदमा दर्ज करेगी। मुख्यमंत्री दिल्ली अरविंद केजरीवाल को जेल भेजेगी।
स्वतंत्र भारत में ऐसी हालात कब पैदा हुई थी:
बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल की एक विवेचन 25 जून 2022से सोशल मीडिया पर प्लेटफार्म पर उपलब्ध है:
आपातकाल लगने के बाद इंदिरा गांधी के निशाने पर जयपुर और ग्वालियर की महारानियाँ थीं. संसद में न सिर्फ़ वो विपक्ष की प्रमुख नेताओं में से एक थीं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्र के आम लोगों के बीच लोकप्रिय भी थीं।
उनकी राजनीतिक साख़ कम करने के लिए उन्हें राजनीतिक विरोधी के तौर पर नहीं बल्कि आर्थिक अपराधी के तौर पर गिरफ़्तार किया गया था।
राजमाता गायत्री देवी को परेशान करने का सिलसिला आपातकाल की घोषणा से पहले ही शुरू हो चुका था और जयपुर राजघराने के हर घर, महल और दफ़्तर पर आयकर के छापे पड़ने शुरू हो गए थे।
आपातकाल घोषित होने के समय गायत्री देवी की आयु 56 साल थी और उनका मुंबई में इलाज चल रहा था।
जब वो 30 जुलाई, 1975 की रात को अपने दिल्ली के घर पहुंचीं तो पुलिस ने उन्हें विदेशी विनिमय और स्मगलिंग विरोधी कानून के तहत गिरफ़्तार कर लिया।
उनके साथ उनके बेटे कर्नल भवानी सिंह को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
उन पर आरोप लगाया गया कि उनके पास विदेश यात्रा से बचे कुछ डॉलर्स हैं जिनका हिसाब उन्होंने सरकार को नहीं दिया है।
दोनों को दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
तिहाड़ की बदबूदार कोठरी जिसमें कोई पंखा नहीं था
वहाँ ले जाने से पहले उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
गायत्री देवी अपनी आत्मकथा ‘अ प्रिंसेस रिमेंबर्स’ में लिखती हैं: पुलिस स्टेशन पर हर किसी ने भवानी सिंह को पहचान लिया। वो राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड रह चुके थे और उन्हें 1971 की लड़ाई में वीरता के लिए महावीर चक्र मिला था।
उस समय दिल्ली की सारी जेलें उसी तरह भरी हुई थीं जैसे पीक टूरिस्ट सीज़न में होटल भर जाया करते हैं। तिहाड़ जेल के अधीक्षक ने पुलिस अफसर से कुछ समय माँगा ताकि वहाँ हमारे रहने का इंतेज़ाम किया जा सके।
“तीन घंटे बाद जब हम तिहाड़ पहुंचे तो उसने हमारे लिए चाय मंगवाई और हमारे घर फ़ोन कर हमारे बिस्तर मंगवा लिए।
जॉन ज़ुब्रज़िकी राजमाता की जीवनी ‘द हाउज़ ऑफ़ जयपुर’ में लिखते हैं:
भवानी सिंह को जेल में बाथरूम वाले कमरे में रखा गया जबकि गायत्री देवी को एक बदबूदार कमरा दिया गया था जिसमें एक नल तो लगा था लेकिन उसमें पानी नहीं आता था. महारानी के कमरे में कम्युनिस्ट कार्यकर्ता श्रीलता स्वामिनाथन को भी रखा गया था।
कमरे में सिर्फ़ एक पलंग था जिसे श्रीलता ने महारानी को दे दिया था और वो खुद ज़मीन पर दरी पर सोती थीं। महारानी के रसूख की वजह से उन्हें रोज़ एक सेंसर किया हुआ समाचारपत्र और सुबह की चाय दी जाती थी। शाम को उन्हें अपने बेटे भवानी सिंह के साथ टहलने की इजाज़त थी।
विजयराजे सिंधिया को भी तिहाड़ लाया गया:
एक महीने बाद तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने गायत्री देवी को बताया कि ग्वालियर की राजमाता विजयराजे सिंधिया को भी वहाँ लाया जा रहा है और उनको उनके कमरे में ही रखा जाएगा।
राजमाता ने उसका ये कहते हुए विरोध किया कि अगर उनके कमरे में एक और पलंग लगाया गया तो वहाँ खड़े रहने की भी जगह नहीं बचेगी।
गायत्री देवी अपनी आत्मकथा ‘द प्रिंसेज़ रिमेंबर्स’ में लिखती हैं:
मुझे योगा करने के लिए अपने कमरे में थोड़ी जगह चाहिए थी और मुझे रात में पढ़ने और संगीत सुनने की भी आदत थी।हम दोनों की आदतें भी अलग-अलग थीं। वो अपना अधिकतर समय पूजा-पाठ में बिताती थीं।
बहरहाल जेल सुपरिटेंडेंट ने मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिया और राजमाता के लिए दूसरे कमरे की व्यवस्था की गई लेकिन चूँकि सितंबर की उमस भरी गर्मी थी, राजमाता ने मुझसे पूछा क्या वो मेरे कमरे से लगे बरामदे में सो सकती हैं? मैंने एक पर्दा लगवा कर अपने बरामदे में उनके लिए पलंग बिछवाई।
जयप्रकाश नारायण ने ‘भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि’ कब कहा था:- स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक काल:
25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का 21 महीने की अवधि में भारत में आपातकाल घोषित था। तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की अनुच्छेद 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी थी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक काल था। आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए तथा नागरिक अधिकारों को समाप्त करके मनमानी की गई। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इसे ‘भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि’ कहा था।
इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को कैद कर लिया गया और प्रेस पर प्रतिबंधित लगा दिया गया;
इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को कैद कर लिया गया और प्रेस पर प्रतिबंधित लगा दिया गया। प्रधानमंत्री के बेटे संजय गांधी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर पुरुष नसबंदी अभियान चलाया गया।
लोकसभा में 2024के चुनाव के पहले प्रधानमंत्री का भाषण;
परिवारवाद पर हमला
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अगर किसी परिवार में अपने बलबूते पर, जनसमर्थन से, एक से अधिक लोग राजनीतिक क्षेत्र में प्रगति करते हैं तो उसे हमने परिवारवाद नहीं कहा। हम परिवारवाद उसे कहते हैं जब परिवार पार्टी चलाता है, परिवार के लोगों को प्राथमिकता देता है, सारे निर्णय परिवार के लोग करते हैं, वो परिवारवाद है।’
बंटवारे का आरोप:
पीएम मोदी ने कहा, ‘कब तक टुकड़ों में सोचते रहोगे, कब तक समाज को बांटते रहोगे, बहुत तोड़ा देश को… अच्छा होता कि जाते-जाते तो कम से कम इस चर्चा के दरम्यान कुछ सकारात्मक बातें होती, कुछ सकारात्मक सुझाव आते। लेकिन हर बार की तरह आपने देश को काफी निराश किया।’





















