=सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ह्वाट्सएप चैनल पर अखिलेश यादव ने शेयर की जैन समाज को संबोधित अपनी चिठ्ठी
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज 18अप्रैल।
प्रिय जैन समाज,जय जिनेंद्र!वर्तमान समय में देश में अल्पसंख्यक होना एक अभिशाप बनता जा रहा है।
अखिलेश यादव ने अपने निज चैनल पर शेयर चिठ्ठी में लिखा:
“@Press Ranjeet Gupta आज अल्पसंख्यक जैन समुदाय के मध्य भय, असुरक्षा और अनिश्चितता की जो भावना व्याप्त है, वो अत्यधिक चिंता का विषय है।”
चर्चा, निंदा और आक्रोशपूर्ण प्रतिक्रिया संपूर्ण विश्व में होने की जानकारी देते हुए अखिलेश यादव ने अपनी चिट्ठी में लिखा है:
“शांतिप्रिय जैन समाज पर अचानक बढ़ते जा रहे हमलों की कड़ी में :
“यदि मप्र के सिंगोली थाना क्षेत्र में एक मंदिर के प्रांगण में जैन मुनियों पर हुआ हिंसक हमला, शारीरिक हमले की श्रेणी में आता है। इसके बाद एक राजनीतिक दल का नाम लेते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लिखते हैं :
“जबलपुर में और उनके संगी-साथी के बीच लीक हुए टेलीफ़ोनिक ऑडियो में जैनियों के बारे में की गयी बेहद दुर्भावनापूर्ण-आपत्तिजनक टिप्पणियां एक वाचिक हमला रहा और मुंबई में जैन मंदिर के ध्वस्तीकरण और जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों, जिनवाणी व अन्य पूजनीय ग्रंथों और शास्त्रों का निर्वासन और निरादर बेहद गंभीर और घोर निंदनीय कुकृत्य की श्रेणी में आएगा।”
आख़िर ये क्यों होता है? यह सवाल उठाते सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कहते हैं:
“जहां-जहां भी भाजपा की सरकार है वहां-वहां जैनियों के तीर्थस्थलों, मंदिरों, जिनालयों, चैत्यालयों, समाजसेवी संस्थानों और समाज के साथ ऐसी विद्वेषपूर्ण घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा:
“एक ऐसा बहुत बड़ा वर्ग है, जो जैनियों की धार्मिक, सार्वजनिक, व्यापारिक-व्यावसायिक ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत संपत्तियों पर भी आँख गड़ाए बैठा है और जैनियों को अल्पसंख्यक ही मानकर उनसे उनका सब कुछ छीन लेना चाहता है ।”

समाजवादी पार्टी – हतोत्साहित करनेवाली घटनाएं जैन समुदाय को कमज़ोर नहीं कर पाएंगी: पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
जैन समाज अल्पसंख्यक के रूप में उस 90 प्रतिशत जनसंख्या के हिस्सा हैं, ‘पीडीए’ ने जिनकी रक्षा-सुरक्षा और एकजुटता का संकल्प लिया है, कठिन समय में हम सब जैन समाज के साथ हैं: अखिलेश यादव
गुजरात में ‘श्री गिरनारजी’ के मंदिर पर क़ब्ज़े का प्रकरण हो या श्री सम्मेद शिखर जी’ सरकार का आपत्तिजनक हस्तक्षेप या फिर कुछ साल पहले उप्र के बागपत-बड़ौत के एक जैन कॉलेज की वो घटना जिसमें जैनियों की पूज्य ‘श्रुतिदेवी’ की प्रतिमा स्थापित करने का उग्र विरोध । या फिर – मप्र के नीमच में एक बुजुर्ग जैन 65 वर्षीय ‘भंवरलाल जैन’ को एक प्रभुत्वशाली व्यक्ति द्वारा थप्पड़ मार-मारकर मार डालने की भयानक घटना। यह चिंता जताते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिखा:
“ये सब कुछ जैन समुदाय के उत्पीड़न के ही मामले हैं। ये तो वो घटनाएं हैं जो प्रकाश में आकर उजागर हो गयीं नहीं तो न जाने ऐसे कितने प्रकरण हैं, जहाँ जैन समाज को प्रताड़ित करने का काम वर्चस्ववादी ताकतें हमेशा करती रही हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा:
जैन समाज आज भाजपा से पूछ रहा है कि हमारा महत्व क्या सिर्फ़ चंदा देने तक सीमित है? हमारे धर्म की और हमारी रक्षा कौन करेगा? जब हम दबाव डालते हैं तो हर बार बाद में माफ़ी माँगने का नाटक किया जाता है!मंदिर को दुबारा बनाने से मूर्तियों, पूजनीय पुस्तकों और जैन समाज-समुदाय का जो अपमान हुआ है, क्या वो वापस आएगा?
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अंत में कहा:
“एक अनुकरणीय आदर्श आचार-सहिंता के रूप में जैन समाज का भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति, शिक्षा, सदाचार, समाजसेवा, जीवन मूल्यों पर आधारित ‘जियो और जीने दो’ का महान संदेश देने वाला सहनशीलता व क्षमाशीलता सिखानेवाला मानवीय व्यवहार व समस्त प्राणियों के प्रति करुणा, प्रेम और अहिंसा का सह अस्तित्वकारी सिद्धांत और साथ ही अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में जो सर्वाधिक अनुपातिक असीम योगदान है, वो अतुलनीय है।”
उन्होंने कहा:
“ऐसी हतोत्साहित करनेवाली घटनाएं जैन समुदाय को चाहकर भी कमज़ोर नहीं कर पाएंगी क्योंकि वो अल्पसंख्यक के रूप में उस 90% जनसंख्या का हिस्सा हैं, ‘पीडीए’ के समेकित रूप में, जिनकी रक्षा-सुरक्षा और एकजुटता का संकल्प हम सबने लिया है। इस कठिन समय में हम सब जैन समाज के साथ हैं।






















