= झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सिद्ध किया बहुमत, 47विधायको का मिला समर्थन, 29विपक्ष में -भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का ईडी पर सत्ता पक्ष ने लगाया आरोप और उदाहरण भी दिया
दुर्केश सिंह, नजरिया न्यूज, संपादकीय प्रभारी झारखंड, 05फरवरी।
झारखंड में हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के नये नेता मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने अपना बहुमत सिद्ध कर दिया। पक्ष में 47और विपक्ष में 29 विधायकों ने मतदान किया। निवर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी सदन में मौजूद रहे। भ्रष्टाचार पर बहस के दौरान भाजपा बैकफुट पर नजर आई। ईडी पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप सत्ता पक्ष ने लगाया और उदाहरण भी दिया। सोशल मीडिया पर निवर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाषण की समीक्षा में पत्रकारों ने कहा: ईडी और भाजपा ने हेमंत सोरेन को आदिवासियों का राष्ट्रीय नेता बना दिया। हेमंत सोरेन ने कहा: जमीन के जिस टुकड़े को लेकर देश के आदिवासी मुख्यमंत्री को गिरफतार किया गया वह आरोप सिद्ध हो गया तो राजनीति से संन्यास ले लूंगा। झारखंड भी छोड़ दूंगा।
सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान वरिष्ठ पत्रकार शाहनवाज ने बताया कि फ्लोर टेस्ट के समय सदन में वे मौजूद थे। न्यायिक हिरासत में सदन में हेमंत सोरेन भी मौजूद थे। उन्होंने बहुमत सिद्ध होने के बाद सदन के बाहर भी मीडिया को संबोधित किया। हेमंत सोरेन जो महत्वपूर्ण बात कही:
जिस जमीन के टुकड़े के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया है, उसका कोई साक्ष्य नहीं है। यह सिद्ध हो गया तो राजनीति ही नहीं झारखंड भी छोड़ दूंगा। भारत की राजनीति में पहली बार देश के किसी मुख्यमंत्री को गिरफतार किया गया है। इसमें कहीं न कहीं राजभवन भी शामिल रहा।
पत्रकार शाहनवाज ने यह भी बताया:
फ्लोर टेस्ट के समय मैं सदन में मौजूद था। भाजपा के 29विधायक मौजूद थे। सभी भाजपा विधायक बैकफुट नजर आए।
पत्रकार मनीष आनंद ने बताया: भाजपा के नेता कांग्रेस पर बरसते रहे। मुख्यमंत्री चंपई सोरेन अपने अंदाज में अपनी बात रखी।सरजू राय ने मतदान ने नहीं किया। हेमंत सोरेन का भाषण ऐतिहासिक रहा। आदिवासी होने का दर्द उन्होंने बयां किया। बीजेपी अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी ली है।
पत्रकार अभिषेक कुमार ने एक सवाल पर कहा: राज्यपाल रघुबर दास को राज्यपाल क्यों बनाया गया, इससे महत्वपूर्ण हेमंत सोरेन का सदन में भाषण रहा। उन्होंने आदिवासी चेतना को ना केवल प्रदेश में अपितु प्रदेश के बाहर भी झकझोरा है। उल्लेखनीय है कि सदन में भ्रष्टाचार की चर्चा के दौरान ईडी द्वारा किसे किसे बचाया जा रहा है, इस चपेट में राज्यपाल रघुबर दास को घसीट लिया गया था।





















