- सरकार की ओर से पॉक्सो एक्ट के स्पेशल पीपी डॉ श्याम लाल यादव ने आरोपी मो चुन्नू को फाँसी देने की अपील की, जबकि वचाब पक्ष के अधिवक्ता मो कमरुजजमा ने कम से कम सज़ा देने की गुहार लगायी थी
- साक्ष्य के आभाव में आरोपी के भाई मो जावेद आलम को रिहा किया गया
- शादी के प्रलोभन के बाद यौनशोषण से बच्ची हो गई थी गर्भवती, अभी उसे 05 साल का बेटा है
- ग्रामीण पंचायती मे आरोपी के परिजनों ने शादी के नाम पर जबरन 02 लाख रुपये व 02 बीघा जमीन की मांग की थी, नही देने पर शादी से इंकार करने की बात कही गई थी
नज़रिया न्यूज़, (रूबी विनीत), अररिया।
स्पीडी ट्रॉयल के तहत 05 साल पूर्व दुष्कर्म व यौनशोषण मामले में पॉक्सो कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए पॉक्सो एक्ट के स्पेशल पीपी डॉ श्याम लाल यादव ने बताया कि
गुरुवार को व्यवहार न्यायालय के जिला व षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश सह पॉक्सो अधिनियम के विशेष न्यायाधीश अजय कुमार की अदालत ने गूँगी बहरी बच्ची के साथ दुष्कर्म कर शादी का प्रलोभन देकर गर्भवती करने व गर्भपात कराने की बात का योजना होने मामला प्रमाणित होने पर जिले के ताराबाड़ी थाना क्षेत्र के बटूरबाड़ी गांव के वार्ड संख्या 13 का रहने वाला 25 वर्षीय मो चुन्ना पिता स्व अब्दुल कय्यूम को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है।
जबकि आरोपी के भाई मो जावेद आलम को साक्ष्य के आभाव में रिहा करने का आदेश जारी किया गया है।
विशेष जानकारी देते हुए पॉक्सो एक्ट के स्पेशल पीपी डॉ श्याम लाल यादव ने बताया कि यौनशोषण से पीड़िता को एक बेटा हुआ था, जिसकी उम्र अभी लगभग 05 साल है।
स्पेशल पीपी डॉ श्याम लाल यादव ने बताया कि न्यायधीश अजय कुमार ने आरोपी मो चुन्ना को कारावास की सज़ा के अलावा आरोपी को 20 हज़ार रुपये जुर्माना लगाया है।
वही, जुर्माना की राशि जमा नही होने पर आरोपी युवक को 01 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास की सज़ा भुगतनी होगी।
इसके अलावा विक्टिम कंपनसेशन फण्ड के रूप में 07 लाख रुपए देने का आदेश जारी किया गया है।
07 लाख रुपए में से 02 लाख रुपए पूर्व में पीड़िता को देय है। 02 लाख और पीड़िता को देना है शेष बचे 03 लाख रुपए पीड़िता के बेटे को दिया जायेगा। चूंकि पीड़िता का बेटा माइनर है. इसलिए बच्चे के बालिग होने तक बच्चे के नाम से किसी नेशनलाइज बैंक में उक्त 03 लाख रुपये फिक्सड डिपॉजिट करने का आदेश जारी किया गया है।
पॉक्सो एक्ट के स्पेशल पीपी डॉ श्याम लाल यादव ने बताया कि गूँगी बहरी पीड़िता देर संध्या शौच करने के लिए अपने घर से बाँसबाड़ी गई थी। जहाँ पहले से घात लगाए मो चुन्ना ने चाकू का भय दिखाकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। दुष्कर्म करने के बाद आरोपी बोला कि अगर किसी को कहोगी तो जान से मार देंगे। लेकिन अगर किसी को कुछ नही बताओगी तो शादी कर लेंगे। गरीब दुखयारी बच्ची ने शादी की बात पर गम खाकर किसी को कुछ भी नही कहा।
इधर, शादी का प्रलोभन देकर कई बार आरोपी बच्ची के साथ यौनशोषण करने लगा।
यौनशोषण से बच्ची गर्भवती हो गई। इस बात का पता चलने पर इशारे से बच्ची ने आरोपी को निकाह करने की बात कही। परन्तु आरोपी गर्भपात कराने के लिए दवा लाकर दे दिया। बच्ची ने दवा नही खाया। इसके बाद बच्ची ने सारी बातें अपने परिजनों को बताई। जहां ग्रामीण पंचायती मे आरोपी के परिजनों ने 02 लाख रुपये व 02 बीघा जमीन की मांग किये। बच्ची के पिता गरीबी के कारण दहेज की मांग पूरी नही किये।
अंततः बच्ची के पिता ने आरोपियों के खिलाफ 29 जुलाई 2018 की घटना को लेकर महिला थाना कांड संख्या 77/ 2018 दिनांक 30 जुलाई 2018 को दर्ज करवाया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद यौनशोषण से पीड़ित पीड़िता ने एक पुत्र को जन्म दिया था। जिसकी उम्र अभी 05 साल का है।
इस मामले में केस आइओ द्वारा केस दर्ज के ढाई साल बाद यानी 28 फरवरी 2021 को चार्जशीट न्यायालय में समर्पित किया। इसके बाद न्यायालय के न्यायधीश ने दिनांक 04 दिसंबर 2023 को आरोप गठन किया।
आरोप गठन के विंदू पर आरोपियों ने अपने आप को बेकसूर बताया। बताया कि ग्रामीण राजनीति के तहत फंसाया गया है।
आरोप गठन के बाद न्यायालय में सरकार की ओर से साक्ष्य प्रारंभ किया गया। जहाँ सभी साक्षियो ने घटना का पूर्ण समर्थन किया।
साक्षियो के बयान से संतुष्ट होकर न्यायालय के न्यायधीश अजय कुमार ने आरोपी चुन्ना को दोषी पाया। जबकि आरोपी के भाई मो जावेद आलम को साक्ष्य के आभाव में रिहा किया।
सज़ा के बिन्दू पर सरकार की ओर से पॉक्सो एक्ट के स्पेशल पीपी डॉ श्याम लाल यादव व बचाव पक्ष के अधिवक्ता मो कमरुजजमा ने अपना-अपना पक्ष रखा था।






















