वैशाली: आज वर्ल्ड टीबी डे के अवसर पर वैशाली जिले में स्वास्थ्य क्रांति का एक नया अध्याय लिखा गया। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में जिले के आला अधिकारियों ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता चेयरपर्सन जिला परिषद द्वारा की गई, जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर समारोह का आगाज किया और जिले को इस गंभीर बीमारी से निजात दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही।
मंच से उठी आवाज: “हाँ! हम वैशाली को टीबी मुक्त बना सकते हैं”
कार्यक्रम के दौरान वर्तमान सिविल सर्जन (सीएस) डॉ. श्यामनंदन प्रसाद और जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. अजय लाल ने पूरे जोश के साथ उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। सिविल सर्जन डॉ. श्यामनंदन प्रसाद और डॉ. अजय लाल ने वर्तमान में चल रहे टीबी उन्मूलन प्रोग्राम्स की लाइव प्रगति साझा करते हुए बताया कि सरकार की ‘निक्षय मित्र’ स्कीम जिले के पेशेंट्स के लिए वरदान साबित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब टीबी का इलाज केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि सही न्यूट्रिशन और सोशल सपोर्ट से हम हर पेशेंट को स्वस्थ कर रहे हैं। जिले के कोने-कोने में फ्री चेकअप और मेडिसिन्स की उपलब्धता को लेकर प्रशासन की मुस्तैदी पर भी चर्चा की गई।
सम्मान की गूँज: पूर्व जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रावत के अनुभवों से मिली नई ऊर्जा-
समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह था जब वैशाली के पूर्व जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रावत को मंच पर सम्मानित किया गया। उनके कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में आए क्रांतिकारी बदलावों और टीबी के खिलाफ उनकी व्यक्तिगत सक्रियता को याद करते हुए वर्तमान अधिकारियों ने उन्हें जिले का मार्गदर्शक बताया। डॉ. रावत ने भी इस सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया और बताया कि कैसे एक सजग अधिकारी समाज के हेल्थ लेवल को ऊपर उठा सकता है।
मैदान में उतरे निक्षय योद्धा: भेदभाव मिटाने और अवेयरनेस फैलाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंतिम सेशन में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों, स्वास्थ्य कर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सुर में टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) को मिटाने की कसम खाई। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. अजय लाल ने लाइव चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया कि टीबी का पेशेंट अपराधी नहीं बल्कि सहायता का पात्र है। कार्यक्रम में मौजूद एक्सपर्ट्स ने बताया कि यदि लक्षणों को पहचान कर तुरंत इलाज शुरू किया जाए, तो जीत निश्चित है। इस गोष्ठी में अन्य प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि वैशाली अब टीबी के खिलाफ जंग के लिए पूरी तरह तैयार है।






















