दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज पटना, 20जनवरी।
लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करते हुए पीठासीन अधिकारियों को विधानमंडलों को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना चाहिए तथा लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करना चाहिए। यह बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कही।श्री बिड़ला 22जनवरी को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित 85वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए देश के विभिन्न प्रदेशों की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा:सदन की कार्यवाही में सुनियोजित व्यवधान डाला जाता है।बैठकों की संख्या में कमी की प्रवृत्ति और विधायिका की गरिमा तथा शिष्टाचार में गिरावट भी चिंता का विषय है।उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विधायिका बहस और चर्चा के लिए मंच हैं और सदस्यों से लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने की उम्मीद की जाती है।
लोकसभा अध्यक्ष ने आगाह किया कि बैठकों की संख्या में कमी के कारण विधानमंडल अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा करने में विफल हो रहे हैं। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार करने और लोगों की आवाज़ का पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए कुशल समय-निर्धारण और संसदीय समय के प्रभावी उपयोग को प्राथमिकता दें। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे सदनों की गरिमा और प्रतिष्ठा को बनाए रखने और उसे बढ़ाने का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्री बिड़ला ने सुझाव दिया कि सभी राजनीतिक दलों को सदन में अपने सदस्यों के आचरण के लिए आंतरिक आचार संहिता बनानी चाहिए ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान हो। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक विचारधारा और संबद्धता से ऊपर उठकर संवैधानिक मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपनी विचारधारा और दृष्टिकोण व्यक्त करते समय स्वस्थ संसदीय परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने आज पटना के बिहार विधानमंडल परिसर में 85वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (एआईपीओसी) के उद्घाटन भाषण के दौरान ये बातें कहीं हैं।
श्री बिड़ला ने इस बात पर जोर दिया कि पीठासीन अधिकारियों को संविधान की भावना और उसके मूल्यों के अनुरूप सदन चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारियों को सदन में अच्छी परंपराएं और अच्छी बेहतर विधियां स्थापित करनी चाहिए तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाना चाहिए। लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करते हुए पीठासीन अधिकारियों को विधानमंडलों को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना चाहिए तथा लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करना चाहिए।
उन्होंने आग्रह किया कि एआईपीओसी की तर्ज पर राज्य विधानसभाओं को भी अपने स्थानीय निकायों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए इसी तरह के मंच तैयार करने चाहिए।





















