मरीजों ने कहा -भव्या ऐप और क्यू मैनेजमेंट से खत्म हो रही लंबी कतार
मार्च में 30,732 ओपीडी पंजीकरण, सदर अस्पताल पर सर्वाधिक भार
प्रखंड स्तर तक सेवाओं का विस्तार, अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य हुआ साकार
वीरेंद्र चौहान नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज, 31 मार्च।
स्वास्थ्य सेवाओं में भीड़, अव्यवस्था और लंबे इंतजार की समस्या वर्षों से आमजन के लिए गंभीर चुनौती बनी रही है, जिसके कारण न केवल उपचार में विलंब होता था बल्कि मरीजों की संतुष्टि भी प्रभावित होती थी। ऐसे परिदृश्य में डिजिटल कतार प्रबंधन प्रणाली और भव्या ऐप जैसी पहलें स्वास्थ्य व्यवस्था में एक संरचनात्मक परिवर्तन के रूप में उभरकर सामने आई हैं। इन तकनीकी उपायों ने सेवाओं को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है, जिससे मरीजों को समयबद्ध और सम्मानजनक उपचार मिल रहा है। यह पहल सरकार की उस स्पष्ट मंशा को दर्शाती है, जिसके तहत अंतिम व्यक्ति तक सुलभ, प्रभावी और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सुनिश्चित किया जा रहा है।
ओपीडी पंजीकरण में बढ़ोतरी, आंकड़े खुद बता रहे बदलाव की कहानी
जिले में मार्च 2026 में कुल 30732 मरीजों ने विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में ओपीडी पंजीकरण कराकर उपचार प्राप्त किया, जो डिजिटल व्यवस्था के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। इनमें सदर अस्पताल किशनगंज में सर्वाधिक 6581 मरीजों ने पंजीकरण कराया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह संस्थान अभी भी जिले का मुख्य उपचार केंद्र बना हुआ है।प्रखंड स्तर पर भी मरीजों की भागीदारी उल्लेखनीय रही, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिघलबैंक में 4755 , ठाकुरगंज में 4639 और पोठिया में 4098 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इसी क्रम में बहादुरगंज में 3264, टेढ़ागाछ में 2730 और कोचाधामन में 2207मरीजों ने सेवाओं का लाभ उठाया।वहीं रेफरल अस्पताल छत्तरगाछ में 1254 तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलवा में 1204 मरीजों का पंजीकरण दर्ज किया गया, जो यह संकेत देता है कि धीरे-धीरे निचले स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। यह संपूर्ण परिदृश्य दर्शाता है कि डिजिटल व्यवस्था ने न केवल मरीजों को सुविधा दी है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी सकारात्मक प्रभाव डाला है।
डिजिटल प्रणाली से मरीजों को मिली वास्तविक राहत
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि क्यू मैनेजमेंट सिस्टम और भव्या ऐप के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया अनुशासन स्थापित हुआ है। अब मरीजों को अनावश्यक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती, जिससे उनकी संतुष्टि में वृद्धि हुई है। यह प्रणाली डॉक्टरों के लिए भी सहायक है, क्योंकि इससे कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो गई है। हमारा प्रयास है कि जिला अस्पताल पर भार को संतुलित करते हुए प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों को और सशक्त बनाया जाए, ताकि हर व्यक्ति को उसके नजदीक ही बेहतर उपचार मिल सके।
तकनीक के माध्यम से सुदृढ़ हो रहा स्वास्थ्य तंत्र
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कहा कि डिजिटल कतार प्रबंधन और ऑनलाइन पंजीकरण जैसी पहलें केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का माध्यम हैं। इससे आमजन को समय पर उपचार मिल रहा है और अस्पतालों में अव्यवस्था की स्थिति समाप्त हो रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंचे, और यह डिजिटल प्रणाली उसी दिशा में एक प्रभावी कदम है।
सदर अस्पताल में सुधार, डॉक्टरों को मिल रहा बेहतर कार्य वातावरण
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने बताया कि क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने के बाद अस्पताल में भीड़ को नियंत्रित करना आसान हो गया है। अब प्रत्येक मरीज का पंजीकरण और जांच एक निश्चित क्रम में हो रही है, जिससे डॉक्टरों को प्रत्येक मरीज पर ध्यान केंद्रित करने का पर्याप्त समय मिल रहा है। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण मरीजों के उपचार में निरंतरता बनी रहती है, जिससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
हर केंद्र पर लागू प्रणाली, भविष्य की मजबूत नींव
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम ने कहा कि जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में भव्या ऐप और क्यू मैनेजमेंट सिस्टम को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। आधार और मोबाइल आधारित पंजीकरण से प्रत्येक मरीज का यूनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार हो रहा है, जिससे सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाया जा रहा है। यह पहल आने वाले समय में पूरी तरह डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला सिद्ध होगी।
अब स्वास्थ्य सेवा बनी आसान और सम्मानजनक
दिघलबैंक निवासी रमेश कुमार ने बताया कि पहले पंजीकरण में काफी समय लगता था और भीड़ के कारण परेशानी होती थी, लेकिन अब मोबाइल से ही प्रक्रिया पूरी हो जाती है। अस्पताल पहुंचने पर बिना भीड़ के जांच हो जाती है, जिससे काफी सुविधा मिलती है।वही ठाकुरगंज की सबीना खातून ने कहा कि भव्या ऐप से इलाज कराना बहुत आसान हो गया है। डॉक्टर समय पर देख लेते हैं और रिपोर्ट भी सुरक्षित रहती है। इससे भरोसा बढ़ा है और समय की भी बचत होती है।
डिजिटल पहल से साकार हो रही आधुनिक और समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था
क्यू मैनेजमेंट और ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली ने यह सिद्ध कर दिया है कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक और स्थायी सुधार संभव है। यह पहल न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर रही है, बल्कि एक ऐसे भविष्य की नींव रख रही है, जहां प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के समय पर, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण उपचार प्राप्त हो सके।
सरकार का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर आमजन के जीवन को अधिक सुरक्षित, सहज और सम्मानजनक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।





















