= भाजपा और आरएसएस में चल रही जुबानी तनातनी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के नये बयान से कम होगा, ऐसा बिहार प्रदेश के वरिष्ठ भाजपाइयों का मानना है
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी, नजरिया न्यूज, 15जनवरी
राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि मोहन भागवत अगर किसी दूसरे देश में ऐसा बयान देते तो इसे देशद्रोह मान कर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाता और मुकदमा चलाया जाता। दरअसल, आरस प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को इंदौर में थे।वहां वो रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार देने के लिए मौजूद थे।
इस पुरस्कार समारोह में भागवत ने कहा था कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को प्रतिष्ठा द्वादशी के तौर पर मनाया जाना चाहिए। इसे ही भारत का ‘सच्चा स्वतंत्रता’ दिवस मानना चाहिए।
मोहन भागवत ने कहा था: ‘प्रतिष्ठा द्वादशी, पौष शुक्ल द्वादशी का नया नामकरण हुआ। पहले हम कहते थे वैकुंठ एकादशी। वैकुंठ द्वादशी अब उसे प्रतिष्ठा द्वादशी कहना क्योंकि अनेक शतकों से परतंत्रता झेलने वाले भारत के सच्चे स्वतंत्रता की प्रतिष्ठा उसी दिन हो गई।स्वतंत्रता थी, प्रतिष्ठित नहीं हुई थी।
भारत स्वतंत्र हुआ 15 अगस्त को। राजनीतिक स्वतंत्रता आपको मिल गई। हमारा भाग्य निर्धारण करना हमारे हाथ में है। हमने एक संविधान भी बनाया। एक विशिष्ट दृष्टि जो भारत के अपने स्व से निकलती है, उसमें से वह संविधान दिग्दर्शित हुआ, लेकिन उसके जो भाव है।उसके अनुसार चला नहीं । और इसलिए हो गए हैं स्वप्न सब साकार कैसे मान लें, टल गया सर से व्यथा का भार कैसे मान लें।
भागवत ने कहा, ऐसी परिस्थिति समाज की, क्योंकि जो आवश्यक स्वतंत्रता में स्व का अधिष्ठान होता है, वह लिखित रूप में संविधान से पाया है, लेकिन हमने अपने मन को उसकी पक्की नींव पर आरूढ़ नहीं किया है।हमारा स्व क्या है? राम, कृष्ण और शिव, यह क्या केवल देवी देवता हैं, या केवल विशिष्ट उनकी पूजा करने वालों के हैं? ऐसा नहीं है।राम उत्तर से दक्षिण भारत को जोड़ते हैं।
इंदौद-मोहन भागवत सोमवार को इंदौर में थे. वहां वो रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार देने के लिए मौजूद थे ।पुरस्कार समारोह में श्री भागवत ने कहा कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को प्रतिष्ठा द्वादशी के तौर पर मनाया जाना चाहिए।इसे ही भारत का ‘सच्चा स्वतंत्रता’ दिवस मानना चाहिए।इस पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बयान आया है जो वायरल हो रहा है….
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी
राहुल गांधी ने नई दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन के मौके पर भागवत के इस बयान टिप्पणी की।
राहुल गांधी ने कहा, ”हमें ये मुख्यालय एक खास समय में मिला है। मेरा मानना है कि इसका प्रतीकात्मक महत्व है क्योंकि कल आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत 1947 में आज़ाद नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि भारत को सच्ची आज़ादी उस दिन मिली जब राम मंदिर बना।वो कहते हैं कि संविधान हमारी आज़ादी का प्रतीक नहीं है।”
राहुल गांधी ने कहा कि मोहन भागवत में ये दुस्साहस है कि हर दो-तीन दिन में वो देश को ये बताते रहते हैं कि आज़ादी के आंदोलन को लेकर वो क्या सोचते हैं।
राहुल गांधी ने कहा, ”मोहन भागवत ये कह रहे थे कि संविधान बेमानी है। उनके बयान का मतलब ये है कि ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ लड़कर हासिल की गई हर चीज़ बेमानी है और उनके अंदर इतना दुस्साहस है कि वो सार्वजनिक तौर पर ये बात कह रहे हैं।मोहन भागवत ने अगर ये बयान किसी और देश में दिया होता तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होती। ये देशद्रोह करार दिया जाता और वो गिरफ़्तार हो जाते। ”
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा:भागवत कर रहे हैं कि भारत को 1947 में आजादी नहीं मिली।ऐसा कहना हर भारतीय का अपमान है। अब हमें इस तरह की बकवास को सुनना बंद कर देना चाहिए।हमें ऐसे लोगों के बकवास को सुनना बंद कर देना चाहिए जो ये सोचते हैं कि हम जो चाहें बोलते रहें और शोर मचाते रहें।
राहुल गांधी ने कहा: आरएसएस की विचारधारा की तरह हमारी विचारधारा भी हजारों साल साल पुरानी है। हमारी विचारधारा हजारों साल से आरएसएस की विचारधारा से लड़ती आ रही है। ये मत समझिये हम एक ऐसी लड़ाई लड़ रहे हैं जिसके नियम पारदर्शी हैं।इस लड़ाई में कोई पारदर्शिता नहीं है।अगर आप समझते हैं कि हम सिर्फ बीजेपी या आरएसएस जैसे राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं तो आप ये समझ नहीं पा रहे हैं आख़िर हो क्या रहा है। हम बीजेपी, आरएसएस और अब खुद इंडियन स्टेट से लड़ रहे हैं।
फिलहाल मोहन भागवत के संदेश का जन-मानस पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं। भाजपा और आरएसएस में मोहन भागवत के इस बयान का दोनों संगठनों में जारी तनाव निश्चित रूप से कम होगा। बिहार प्रदेश के भाजपाई ऐसा मानते हैं।






















