- न्यायिक कार्य नही होने से न्यायार्थियों की परेशानी बढ़ी
- राज्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर कोर्टकर्मी का शत प्रतिशत अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू
नज़रिया न्यूज़ (रूबी विनीत), अररिया।
गुरुवार 16 जनवरी को अपने चिरलम्बित मांगो के समर्थन में न्यायमण्डल अररिया के तमाम कोर्टकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये।
बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ पटना के अध्यक्ष के आहवान पर सभी कर्मी एकजुटता का परिचय देते हुए धरना स्थल पर अडिग बैठे नजर आये।
बताया जाता है कि हड़ताल को लेकर कोर्टकर्मियो ने बुधवार की देर संध्या अनिश्चितकालीन कलमबन्द हड़ताल के संबन्ध में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय को (प्रपत्र-क) के तहत सूचना दे दिये थे। वही, न्यायमण्डल के सभी कोर्ट और कार्यालय की चाभी एक साथ एक डब्बा में रख कर दिनांक 15 जनवरी 2025 के सन्ध्या 5:30 प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय को प्रपत्र-क के साथ समर्पित किया गया था।
सर्वसम्मति से लिये गये निर्णय के आलोक में गुरुवार की सुबह 10 बजे से विरोध प्रदर्शन स्थल कोर्ट परिसर के अन्दर कर्मचारीगण एक साथ एकत्रित होकर शान्तिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किये। अपने चार सुत्री मांगो के समर्थन में पुरे न्यायालय अवधि के दौरान सुबह से शाम तक कोर्टकर्मी घरना स्थल पर बैठे रहे। इस दरम्यान राज्य संघ द्वारा निश्चित चार मांगों को ही नारेबाजी के दौरान दोहराया जाता रहा।
धीमे स्तर के ध्वनि यन्त्र का प्रयोग किया गया। सभी कोर्टकर्मी अपनी विनम्रता और सौम्य व्यवहार को बनाये रखें थे। इस अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन में 15 जनवरी 2025 तक योगदान करने वाले सभी कर्मचारी (पुनः नियोजित कर्मचारी भी)
इस अनिश्चितकालीन कलमबन्द हड़ताल में अपनी उपस्थिति दर्ज किये हुए थे। घरना प्रदर्शन के प्रारंभ में कर्मचारीगण कुछ व्यक्ति की टोली बनाकर न्यायालय का भ्रमण करते देखे गए तथा पूर्णतः अनिश्चितकालीन कलमबन्द हड़ताल को सफल बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाते देखा गया।
इस दौरान न्यायालय एवं न्यायालिय कार्यालय समेत, फैक्स, ई-मेल, इंग्लिश ऑफिस, नाजारत, लेखाविभाग, केस फाइलिंग काउन्टर, रिलीज और रिमांड सभी कार्य पूर्णतः बन्द रहा, इससे कई न्यायार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय एक कोर्टकर्मी रोहित कुमार गुप्ता ने बताया कि राज्यसंघ द्वारा समय समय पर निर्देशित सुझावों के अनुसार ही अनिश्चितकालीन कलमबन्द हड़ताल की गतिविधि में परिवर्तन किया जा सकेगा।
जिला बार एसोसिएशन के वरीय अधिवक्ता सह पीपी लक्ष्मी नारायण यादव ने कहा कि कोर्टकर्मियो की मांगे जायज है। वही, वरीय अधिवक्ता विनोद प्रसाद, देबू सेन, कामाख्या प्रसाद यादव, अरुण सिंह, विनीत प्रकाश सहित दर्जनों अधिवक्ता घरना स्थल पर बैठकर कोर्टकर्मियो को अपना नैतिक समर्थन देते नजर आये।
#हड़ताल क्यों जरूरी है” :- इस संबंध में स्थानीय कई कोर्टकर्मियो ने बताया कि वर्ष 1991 में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा स्नातक स्तरीय वेतनमान का अनुशंसा किया गया, लेकिन 1994 में बिहार सरकार ने उक्त अनुशंसा को खारिज कर दिया, फिर वर्ष 1994 में हीं रिट याचिका सीडब्लूजेसी -5156/1994 पटना उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया। उपरोक्त् रिट में माननीय न्यायाधीश ए.के. गांगुली द्वारा कर्मचारियों के पक्ष में जजमेंट दिया गया
था। लेकिन बिहार सरकारी द्वारा उसे लागू नही किया गया। बताया गया कि आफताब आलम कमिटी द्वारा स्नातक स्तरीय वेतनमान का अनुशंसा किया गया, लेकिन बिहार सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया, शेट्ठी कमीशन द्वारा न्यायिक कर्मचारियों के लिए एक एक्स्ट्रा इंक्रिबमेंट पदोन्नती, विशेष न्यायिक कैडर आदि की अनुशंसा की गई, लेकिन माननीय सर्वोच्चय न्यायालय के फटकार के बाद तत्कालीन कर्मचारियों को केवल एक एक्स्ट्रा इंक्रिबमेंट दिया गया,
परंतु पदोन्नती, विशेष न्यायिक कैडर आदि कर्मचारियों को नहीं मिला और अभी तक कितने कर्मचारी बिना पदोन्नती सेवानिवृत हो गए, वर्ष 2023 में माननीय पटना उच्च न्यायालय की स्टैंडिंग कमिटी ने दो बार बिहार सरकार को स्नातक स्तरीय वेतनमान लागू करने के लिए अनुशंसा किया, लेकिन बिहार सरकार द्वारा उसे लागू नहीं किया गया, दिनांक 20 दिसम्बर 2024 को विधि विभाग ने एक “सकारण आदेश” द्वारा उपरोक्त सारे प्रशासनिक एवं न्यायिक आदेशों को दरकिनार करते हुए सारे अनुशंसाओं/मांग को खारिज कर दिया। इस बावत दिनांक 08 जनवरी 2025 को महानिबंधक पटना उच्च न्यायालय ने कर्मचारी संघ को वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन वार्ता में कोई स्पष्ट आश्वासन नही दिया और यह भी कहा कि आपलोगों के हड़ताल पर जाने से सरकार को “सूई के नोक’ बराबर भी फर्क नही पड़ेंगा, विभिन्न व्यवहार न्यायालयों द्वारा ऑर्डरली से क्लर्क/असिस्टेंट में पदोन्नति के लिए 1191 कर्मचारियों का अनुशंसा माननीय कन्वेनर कमिटी को भेजा गया है, लेकिन वह आज तक मौन है।
पदोन्नति-सरकार के सभी विभागों के कर्मचारियों का पदोन्नति समय-समय पर मिलता रहता है, लेकिन व्यवहार न्यायालय के कर्मचारियों को आजतक कोई पदोन्नति नही मिला है, अनुकंपा-सभी विभागों में कर्मियों के आश्रितों को पूर्ण रूप से अनुकंपा प्राप्त है, जबकि इस न्याय के मंदिर में 3 से 5 प्रतिशत तक हीं अनुकंपा का प्रावधान किया गया है,
वो भी दशकों से नहीं मिला है। विशेष न्यायिक कैडर-शेट्ठी कमीशन ने न्यायिक कर्मचारियों के लिए एक “विशेष न्यायिक कैडर’ बनाने का अनुशंसा किया था, लेकिन आजतक नही बना है।
कोर्टकर्मियो ने विश्वास जताया है कि उनकी मांगे निकट भविष्य में जरूर पूरी होगी।






















