अशोक सिंह, सुबेदार, विशेष संवाददाता नजरिया न्यूज, 10जनवरी।
मीडिया रिपोर्ट के तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसके बाद से शेयर बाज़ार की कई ख़ामियों भी दूर किया। ट्रेडिंग साइकिल को एक सप्ताह से घटाकर एक दिन कर दिया। “बदला” कारोबार को बंद कर दिया गया। केतन पारेख पर शेयर बाज़ार से 14 साल की पाबंदी लगा दी गई। वर्तमान सभी के सामने है! की विवेचना में दिलचस्प कंटेंट सामने आया कि संजय तापड़िया नाम के एक व्यक्ति ने ‘Jack Latest’ को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।केतन पारेख की जन्मतिथि भी 15 फ़रवरी है। उनके पैन कार्ड में यह तिथि दर्ज है। इसके बाद सेबी को एक दिशा मिलने की बात कही जाती है।
सूत्रधार:
सेबी ने केतन पारेख, सालगांवकर और पोद्दार समेत 22 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न धन वापसी, रोक और जुर्माना लगाने सहित उचित निर्देश पारित किए जाएं।
रेगुलेटर ने कहा कि इन इकाइयों को इस आदेश की प्राप्ति की तारीख से 21 दिन के भीतर सेबी के समक्ष अपने जवाब दाखिल करने होंगे।
188 पेज के अंतरिम आदेश में सेबी ने कहा कि ‘रोहित सलगांवकर और केतन पारेख ने ‘फ्रंट-रनिंग’ से बड़े ‘ग्राहकों’ से संबंधित एनपीआई से अनुचित तरीके से लाभ कमाने की पूरी योजना बनाई।सेबी ने जिक्र किया कि पोद्दार ने फ्रंट-रनिंग गतिविधियों में एक सूत्रधार होने की बात स्वीकार की है।
बता दें कि सेबी का केतन पारेख और उनके सहयोगियों को बैन करने का यह आदेश अंतरिम है।
सेवी की नई छवि -अवैध तरीके से 65.77 करोड़ रुपये मुनाफ़ा कमाने काआरोपित कोन है?सेबी ने केतन पारेख को शिकंजे में लाने के लिए नए तरीक़ों का इस्तेमाल किया। केतन पारेख पर आरोप है कि अपनी पहचान छिपाने के लिए कई अलग-अलग फोन नंबर और नामों का इस्तेमाल किया।सेबी ने इनके तार जोड़ते हुए इस घोटाले का पर्दाफाश किया। क्या कहानी गढ़ी गई समझते हैं…
सेबी इस आदेश में बदलाव कर सकता है। इसे वापस ले सकता है या फिर अपने अंतिम फ़ैसले में इस आदेश की पुष्टि कर सकता है।क्योंकि ये मामला जटिल है इसलिए अंतिम फ़ैसले तक पहुंचने में सेबी को कुछ समय लग सकता है।
कहा जा रहा कि इस दौरान केतन पारेख और उनके सहयोगियों के पास अदालत का रुख़ करने का विकल्प खुला रहेगा।वे सेबी के अंतरिम आदेश और उनके ख़िलाफ़ जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दिया जा सकता हैं।
केतन पारेख का इतिहास
केतन पारेख का नाम वर्ष 2000 में भारतीय शेयर मार्केट में बहुत जाना-पहचाना था। शेयर बाज़ार में उनके हर दांव का शेयर व्यापारियों को इंतज़ार रहता था।
यह दौर था कि जब उन्होंने कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज में अलग ही दबदबा अपना बना लिया था।
इतिहास पर नजर रखने के दावेदार कहते हैं कि वर्ष1999 से 2000 तक दुनिया पर टेक्नोलॉज़ी हावी थी। भारत में भी शेयर बाज़ार तेजी के दौर में था। इसी समय केतन पारेख की कथिथ अनियमितता सामने आ गई।
फिलहाल सेबी की जांच में पाया गया कि केतन ने बैंक और प्रोमोटर्स के फंड्स का इस्तेमाल शेयरों की कीमत नाजायज़ तरीके से बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया।पारेख को मार्च 2001 में गिरफ़्तार कर लिया गया और 50 से अधिक दिनों तक वह हिरासत में रहे।
कार्रवाई:
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसके बाद से शेयर बाज़ार की कई ख़ामियों भी दूर किया। ट्रेडिंग साइकिल को एक सप्ताह से घटाकर एक दिन कर दिया। “बदला” कारोबार को बंद कर दिया गया। केतन पारेख पर शेयर बाज़ार से 14 साल की पाबंदी लगा दी गई। वर्तमान सभी के सामने है!






















