पियूष सिंह, विशेष संवाददाता नजरिया न्यूज, 23दिसंबर।
तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली की सीमा पर हुए किसान आंदोलन के दौरान जगजीत सिंह डल्लेवाल राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण किसान नेता के रूप में उभरे।
इस आंदोलन के दौरान कई किसान नेता किसी न किसी रूप में विवादों में भी फंसे, लेकिन डल्लेवाल उन नेताओं में से रहे, जिन्होंने आंदोलन के दौरान विनम्रता का साथ नहीं छोड़ा।
डल्लेवाल ने पिछला पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने वाले किसान नेताओं का सार्वजनिक तौर पर विरोध किया था।
बिहार में पहुंच रही जानकारी के मुताबिक खनौरी बॉर्डर पर डटे किसानों को डर है कि सरकार जगजीत सिंह डल्लेवाल को किसान मोर्चे से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा सकती है, जहां उन्हें ड्रिप लगाई जा सकती है।
अधिकांश मामलों में आमरण अनशन पर बैठे व्यक्ति को पुलिस ही अस्पताल में भर्ती करवाती है।इससे पहले 26 नवंबर को पुलिस ने डल्लेवाल को इसी मोर्चे से जबरन उठाकर लुधियाना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। हालांकि किसानों के दबाव के चलते पुलिस ने डल्लेवाल को रिहा कर दिया था।
2015 में सिख कैदियों की रिहाई के लिए आमरण अनशन करने वाले सूरत सिंह खालसा को करीब 8 साल तक लुधियाना के एक निजी अस्पताल में रखा गया था।सूरत सिंह खालसा का कहना था कि कई ऐसे सिख कैदी हैं जिन्हें उनकी सजा काटने के बाद भी जेलों में रखा गया है।
पंजाब -हालांकि, इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब किसी संगठन के नेता ने आमरण अनशन शुरू किया और सरकार ने दबाव में आकर माँगें मान लीं…
किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा के मुताबिक, वह किसी भी हालत में जगजीत सिंह डल्लेवाल को जबरन उठाने नहीं देंगे।
इतिहास में आमरण अनशन के उदाहरण-क्रांतिकारी भगत सिंह के साथी जतिन दास की 63 दिन की भूख हड़ताल के बाद लाहौर जेल में हो गईथी मौत
यह पहली बार नहीं है कि किसी आंदोलन के नेता ने अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन किया हो। इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब कोई नेता मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हों।1920 के दशक में, किसान मुद्दों के लिए संघर्ष करने वाले प्रजा मंडल आंदोलन के नेता सेवा सिंह ठीकरीवाला जेल में मरने तक भूख हड़ताल पर रहे। प्रजा मंडल पार्टी की कुछ प्रमुख मांगें मध्यम वर्ग के किसानों के मुद्दों से संबंधित थीं।
20 जनवरी, 1935 को आधी रात को भूख हड़ताल के दौरान सेवा सिंह ठीकरीवाला की मृत्यु हो गई।
क्रांतिकारी भगत सिंह के साथी जतिन दास की 63 दिन की भूख हड़ताल के बाद लाहौर जेल में मौत हो गई।
पंजाब के एक महत्वपूर्ण सिख नेता दर्शन सिंह फेरुमान ने पंजाबी सूबे की मांग के लिए 15 अगस्त, 1969 को भूख हड़ताल शुरू की। 27 अक्टूबर, 1969 को उनका निधन हो गया।
हालांकि, इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब किसी संगठन के नेता ने आमरण अनशन शुरू किया और सरकार ने दबाव में आकर माँगें मान लीं।






















