दुर्कैश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज 18दिसंबर।
देश के बुद्धिजीवियों में संविधान पर चर्चा हो रही है। अपने -अपने अध़्ययन के अनुसार 75वर्ष की यात्रा देश ने कैसे पूरी की। इस पर कवि सम्मेलनों में खुद कहा गया है। शायद, कवियों और पत्रकारों ने संविधान की प्रस्तावना को प्रतिदिन जिया है। लेकिन लोकसभा में प्रधानमंत्री से लेकर सांसदों तक ने कवि और पत्रकारों ने चर्चा नहीं की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन को बधाई दूंगा। उन्होंने अपना अध्धयन ग़ज़लों के शब्दों के सहारे लोकसभा में रखा। कुमार विश्वास की अटैच वीडियो में शब्द के अर्थ की पीड़ा बयां की गई है। काश ! शब्दों के अव्यक्त अर्थ लोकसभा भी पढ़ सकने सक्षम बन जाती।
100 दिवसीय टीबी मरीज खोज अभियान में 22 हजार लोगों की हुई स्क्रीनिंग
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