नज़रिया न्यूज़ (विकास प्रकाश), अररिया।
पिछले 10 वर्षों में न्यायमण्डल अररिया के पदस्थापना वर्ष 2014 से अबतक डीजे डिवीजन से जुड़े सभी न्यायिक पदाधिकारियों के न्यायलयों से लगभग 1200 से अधिक मामलो मे कई हज़ारों वारंटियों के खिलाफ कुर्की, जप्ती की करवाई के बाद अन्ततः गिरफ्तारी नही होने पर फरारी (परमानेंट वारेंट/एब्सकाउनडर) किया गया है।
वही, सीजेएम डिवीजन से जुड़े सभी न्यायिक पदाधिकारियों के न्यायलयों से लगभग 1400 से अधिक मामलो मे वारंटियों के खिलाफ भी कुर्की, जप्ती की करवाई के बाद अन्ततः फरारी (परमानेंट वारेंट/एब्सकाउनडर) किया गया है।
हालांकि ऐसे कई मामलों में न्यायिक आदेश मिलने के बाद जिले के विभिन्न थानों में तैनात पुलिस द्वारा कई अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित किया भी गया है, लेकिन अभी भी कई मामलो मे गिरफ्तारी की कच्छप गति से इंकार नही किया जा सकता है।
कई मामलो मे अभी भी फरारी (परमानेंट वारेंट/एब्सकाउनडर) पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
इस संबंध में जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष सह वरीय अधिवक्ता विनोद प्रसाद ने पूछने पर बताया कि अगर जिले की पुलिस निष्पक्षता के साथ फरारी (परमानेंट वारेंट/एब्सकाउनडर) अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने में जुट जाता है तो जल्द से जल्द कई मामलो का निस्तारण निकट भविष्य में संभव हो सकेगा।
इससे न्यायालयों में बढ़ते मुकदमाओ का बोझ भी कम होगा।






















