नजरिया न्यूज अररिया/बिहार। बिहार में कानून और संविधान का पालन अब बस कागजों तक ही सीमित रह गया है। नेताओं के प्रभाव और दबाव में सरकारी तंत्र पूरी तरह से झुकता नजर आ रहा है। खासकर, जो लोग सच्चाई उजागर करने की कोशिश करते हैं, उनके लिए हालात और भी बुरे हो गए हैं। पत्रकार, जिन्हें लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड में सामने आया है, जहां भाजपा नेताओं के दबाव में प्रशासन ने पत्रकार पर हुए हमले के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की।
क्या है पूरा मामला
बीते दिनों फारबिसगंज प्रखंड के जोगबनी नगर परिषद क्षेत्र में एक नाला निर्माण कार्य चल रहा था। इस कार्य में हो रही अनियमितताओं को लेकर ‘द वायरल न्यूज़’ के पत्रकार साधन यादव ने अपनी रिपोर्टिंग के जरिए सच उजागर किया। लेकिन सच दिखाना शायद नेताओं को नागवार गुजरा, और इसके परिणामस्वरूप साधन यादव पर हमला कर दिया गया। आरोप है कि भाजपा नेता रोहित यादव, जो कि जोगबनी के मुख्य पार्षद पति हैं, ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पत्रकार को जबरन नशीली पदार्थ खिलाया और कई सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए।
पुलिस का उदासीन रवैया
इस घटना के बाद पत्रकार साधन यादव ने 21 सितंबर, 2024 को पुलिस अधीक्षक अररिया सहित कई अधिकारियों को अपनी शिकायत दर्ज कराई। फारबिसगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस घटना की सूचना दी गई थी, लेकिन बाथनाहा थाने की पुलिस ने मामले को यह कहकर अनदेखा कर दिया कि यह उनके क्षेत्र का मामला नहीं है।
1 जुलाई, 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून के तहत, किसी भी थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। फिर भी, पुलिस ने इस कानून का पालन करने के बजाय मामले को नजरअंदाज कर दिया। यह घटनाक्रम पुलिस के कामकाज और उनके जिम्मेदारी के प्रति उदासीन रवैये को उजागर करता है।
उल्टे पत्रकार पर मामला दर्ज
रोहित यादव ने मामले को पलटते हुए, अपने सहयोगी घनश्याम राम के माध्यम से पत्रकार पर झूठा मामला दर्ज करा दिया। आरोप है कि यादव ने उन सादे कागजों का इस्तेमाल किया जिन पर पत्रकार से जबरन हस्ताक्षर करवाए गए थे, और उन्हें नौकरी दिलवाने का झांसा देकर पैसे ठगने का आरोप लगा दिया। इसके साथ ही एससी-एसटी एक्ट के तहत 26 सितंबर, 2024 को बाथनाहा थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। यह स्पष्ट रूप से पत्रकार को दबाने की साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
प्रशासन की चुप्पी और पत्रकारों का विरोध
पत्रकार साधन यादव के द्वारा दी गई शिकायत पर अब तक 13 दिनों से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या अररिया की पुलिस नेताओं के हाथों की कठपुतली बन गई है? इस घटना ने जिले के पत्रकारों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। 4 अक्टूबर, 2024 को डिजिटल प्रेस क्लब अररिया की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी पत्रकारों ने एकजुट होकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
बड़ा आंदोलन की चेतावनी
यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो डिजिटल प्रेस क्लब अररिया ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। क्लब ने स्पष्ट किया है कि इस आंदोलन के लिए जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ प्रशासन होगा। इस पूरे मामले में प्रशासन का ढुलमुल रवैया न केवल पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कानून की रक्षा करने वाले अधिकारी खुद नेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं।






















