संजय कुमार संवाददाता पलासी अररिया।
पलासी थाना क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में आई तेज आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचा दी।आंधी के कारण कई जगह कच्चे और टीन के बने घर उजड़ गए, जिससे अनेक परिवार बेघर हो गए हैं।वहीं गेहूं और मक्का की तैयार फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।किसानों ने बताया कि तेज हवा और पानी से खेतों में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।प्रभावित किसानों में तरबी गांव के राजेन्द्र यादव, बड़गांव के रोबिन्द्र चन्द्र साह, बिहारी गांव के रामकृष्ण यादव, चण्डीपुर के विजय झा, भटवार के रमेश चौधरी, गोपालनगर के मो. हेलाल शामिल हैं।
इसके अलावा पलासी के मोबिन अख्तर, शाद आलम, मखमुल हयात और शमशाद आलम अफरोज आलम ने भी फसल बर्बाद होने की बात कही है।किसानों ने कहा कि गेहूं और मक्का की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है।उन्होंने सरकार से तत्काल क्षतिपूर्ति और मुआवजा देने की मांग की है।आंधी-पानी का असर सिर्फ खेतों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।पलासी चौक स्थित पुराने ब्लॉक के पास बीएसएनएल टावर के समीप तौसीफ की मोटरसाइकिल दब गई।
घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सड़क किनारे और मुख्य मार्गों पर कई जगह पेड़ गिर पड़े हैं।पेड़ों के गिरने से कई इलाकों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।कुछ स्थानों पर ट्रैफिक व्यवस्था भी चौपट हो गई है।आंधी के कारण कई बिजली के पोल भी गिर गए हैं।बिजली पोल गिरने से क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति चरमरा गई है।कई गांवों में देर शाम तक बिजली सेवा बाधित रहने की सूचना है।स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज हवा इतनी भयावह थी कि लोग घरों से बाहर निकलने तक की हिम्मत नहीं जुटा सके।कच्चे मकानों के उजड़ने से गरीब परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है।कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है।लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का सही आकलन कर राहत दी जानी चाहिए।
किसानों ने कहा कि यदि जल्द सहायता नहीं मिली तो उनके सामने आर्थिक संकट गहरा जाएगा।स्थानीय ग्रामीणों ने टूटे घरों की मरम्मत और फसल क्षति का मुआवजा देने की मांग उठाई है।आंधी-पानी के बाद पूरे क्षेत्र में तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है।सड़कों पर गिरे पेड़, टूटे पोल और बर्बाद फसलें आपदा की गंभीरता को बयां कर रही हैं।प्रशासनिक स्तर पर राहत और बचाव कार्य की मांग तेज हो गई है।
ग्रामीणों को अब सरकारी सहायता और पुनर्वास की उम्मीद है।प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर किसानों और गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है।पलासी क्षेत्र में आंधी-पानी से हुई तबाही के बाद जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।






















