नजरिया न्युज।भरगामा।
प्रखंड के खजूरी पंचायत के थरूवापट्टी व दर्जनों गांव के लोगों की नियति बन गई है बदहाल जिंदगी जीना। एक दशक पूर्व से खजूरी एनएच 327 ई से बनमनखी,मधेपुरा एवं पूर्णिया जिला से जोड़ने वाली सड़क जर्जर हाल में। जबकि हल्की बारिश होते हीं सड़क कीचड में तब्दील हो जाता है। जगह-जगह पुल पुलिया के बैरिकेडिंग विहीन है। जहां आए दिन दुर्घटना होती है। गौरतलब हो इस सड़क से 15 किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को 2 घंटे से ज्यादे का समय लगता है। स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा इस सड़क के बारे में आवाज उठाई गई है। लेकिन इसे सुनने वाला कोई भी प्रतिनिधि या जिला प्रशासन सुनने को तैयार नहीं प्रशासन के उदासीन रवैया से परेशान ग्रामीण पलायन करने की सोच रहे है।
भरगामा प्रखंड अंतर्गत थरूवापट्टी एक तरफ खजूरी एनएच 327 ई से जुड़ती है तो दुसरी तरफ चरैयाहाट होते हुए अंतरजिला पुर्णिया,मधेपुरा,सुपौल जिला से जुडने वाली सड़क एक दशक से जर्जर हाल में है। दर्जनों गांव के लोग इस सड़क से सफर करते हैं। वाहन चालक की सुनें तो लगातार इस सड़क पर लोग दुर्घटनाग्रस्त होकर काल के गाल में समा रहें हैं। लेकिन स्थानीय प्रतिनिधी सिर्फ चुनाव के समय लंबी लंबी डींगें मारकर चले जाते हैं। परिणाम ढाक के तीन पात। ग्रामीण अपने बेबसी पर फिर पांच साल आँसू बहाते रहते हैं। एक तरफ सरकार विकास के बड़े बड़े दावे कर रही है। दुसरी तरफ ग्रामीण की बेबसी विकास के दावे को सशंकित नजरों से देखकर खामोश। आखिर इनकी परेशानी को सुनेगा कौन। अब ग्रामीण आस लगाए बैठे हैं कि बिहार में बने नई सरकार के कार्यकाल में उनके दिन बदलेंगें।
कब तक ग्रामीण इस नारकीय जीवन को जीते रहेगें। यह एक बड़ा सवाल है। प्रसाशन व प्रतिनिधी के उदासीनता की पोल अब खुल रही है। ग्रामीण परेशान होकर अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचते हैं। जिसको लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी है।
यह सड़क दर्जनों गांव को अंतरजिला से जोडने वाली पक्की सड़क है। जर्जर सड़क व जगह-जगह गढ्ढे से लोगों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। दशक पूर्व सरकार सड़क निर्माण कर अपनी पीठ तो थपथपा ली। लेकिन देखरेख के अभाव में सड़क विकास के वादों का मुंह चिढ़ा रहा हैं। परेशानी का आलम यह है कि ग्रामीण भी अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करते हैं। ऐसे में स्थानीय ग्रामीण की बेबसी उनके चेहरों से साफ झलकती हैं। यह सडक राहगीर सहित स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया हैं । बताया जाता हैं कि स्थानीय ग्रामीण के द्वारा सडक निर्माण के लिए स्थानीय प्रतिनिधी को सूचना दिया। इसके बावजूद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई सकारात्मक पहल अबतक नही हो सका हैं। जिस कारण यह रास्ता काफी खतरनाक बन चुका हैं। गौरतलब हो इस सड़क से प्रतिदिन काफी संख्या में लोगों का आना जाना होता हैं। आधा दर्जन पंचायत के हजारों लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के सामानों के लिए खजूरी व अंतरजिला बनमनखी जाते हैं। सड़क जर्जर रहने से लोगों को किसी तरह अपनी जिंदगी का गुजारा करना पडता है। बदहाल सड़क के कारण लोगों को आवागमन मे न केवल परेशानी उठाना पड़ा रहा हैं बल्कि हमेशा दुर्घटना का भय सताते रहता हैं।
समाजसेवी अजय कुमार अमरेंद्र बताते हैं। सड़क जब सुचारू रूप से अच्छा था तब थरूवापट्टी में भी रौनक बनी रहती थी लेकिन सड़क जर्जर होते ही लोगों का आवागमन कम हो गया है। जिससे लोगों के सामने परेशानियों का पहाड़ खड़ा हो गया। दिन-ब-दिन दर्जनों गांव के लोग खरीदारी करने के लिए आना बंद कर दिया जिससे व्यापार भी काफी प्रभावित हुआ हैं। ऐसे में जल्द से जल्द सड़क का निर्माण नहीं किया गया तो मधेपुरा व पुर्णिया जिले से दर्जनों गांव के लोगों का संपर्क टूट जाएगा। जो व्यापारिक दृष्टिकोण से काफी नुकसानदायक होगा।
स्थानीय रामेश्वर मंडल, शंभू मंडल, भुवनेश्वर मंडल, सुशील यादव, वार्ड सदस्य रूपेश कुमार, लक्ष्मी मंडल,पूर्व समिती सदस्य सरिता भारती,शोभा देवी ,पृथ्वी साह,मुकेश साह,कदमलाल मेहता,भोला सिंह, वार्ड सदस्य भोला मंडल,शिवनाथ मेहता,राजकिशोर पासवान, महेंद्र ऋषिदेव इत्यादि ने जिला प्रशासन व स्थानीय विधायक का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए इस जर्जर सडक को शीध्र निर्माण करवाने की मांग की हैं। ताकि आमजन को आवागमन मे हो रही परेशानियों से निजात मिल सके।























