- बड़ी -बड़ी मछलियां निगल रहीं गरीब मेधावी विद्यार्थियों का सपना- कठघरे में हर परीक्षा
- नीट परीक्षा की जांच में सामने आया तथ्य- डीएसपी गोधरा का इंवेस्टिगेशन लेटर हो रहा वायरल
*दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी, नजरिया न्यूज, 09जुलाई।*
बड़ी-बड़ी परीक्षाओं में सफल होकर गरीबी और आर्थिक असमानता से लड़ने का सपना गरीब मेधावी विद्यार्थियों को छोड़ देना चाहिए। नीट जैसी परीक्षा में धांधली की जांच का परिणाम इस दर्द को बयां करता है। 10लाख रुपये नगद और ब्लैंक चेक के बदौलत 100में 100अंक प्राप्त किया गया।
वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह राज कहते हैं रुपये वाले क्या नहीं मैंनेज कर सकते। चकबंदी में पेतृक भूमि और चक की मालियत चकबंदी अधिकारी इधर-उधर कर सकते हैं। नीट परीक्षा में मूर्ख विद्यार्थी को 100में 100अंक परीक्षा दिलाने दिलवा सकते हैं। देश में एक-दो ईमानदार अधिकारियों के बदौलत एक-दो प्रतिशत सच्चाई सामने आ जा रही है। वरना, परीक्षाओं की सच्चाई इससे भी अधिक भयावह है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेजों में दाख़िले के लिए हुई नीट-यूजी परीक्षा को कथित गड़बड़ियों की वजह से दोबारा आयोजित कराने की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक हुआ, ऐसा प्रतीत होता, लेकिन गड़बड़ी बड़ी पैमाने पर हुई, कुछ जगहों तक सीमित रही, ये तय करने के लिए कुछ तथ्यों की ज़रूरत है।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “ऐसे हालात में, जहां परीक्षा की शुचिता भंग होने से पूरी प्रक्रिया पर ही असर पड़ा है, और गड़बड़ी से लाभान्वित होने वालों को अन्य लोगों से अलग करना संभव नहीं है, तब दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना आवश्यक हो सकता है।
“लेकिन दूसरी तरफ़ जहां चूक कुछ ख़ास जगहों या केंद्रों तक सीमित हो और उससे फ़ायदा उठाने वालों की पहचान करना संभव हो, तो ऐसे में सभी छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना उचित नहीं होगा.’’।
याचिकाकर्ता नीट यूजी की हाल में हुई परीक्षा को रद और इसे दोबारा करवाने के लिए अदालत में पहुँचे हैं।






















