==उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील के तहसीलदार ने अपने आदेश में कहा- मुझे वसीयत खारिज करने का नहीं है अधिकार
= रीना पांडेय बनाम ईश्वर चंद्र, वाद संख्या 9598/ 2022 में
7जून 2024 को सुनाया निर्णय
तश वसीयत के आधार पर तहसीलदार के निर्णय से विधवा गरिमा पांडेय और उनका पांच वर्ष का बेटा पैतृक संपत्ति से हो गया वंचित
=वहीं सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि उत्तराधिकार में मिली संपत्ति की नहीं की जा सकती वसीयत
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी/ अनिल उपाध्याय, पूर्वांचल ब्यूरो/जयकृष्ण पांडेय अधिवक्ता, कादीपुर,नजरिया न्यूज, 18जून।
अजीब विडंबना है! इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के मुताबिक उत्तराधिकार में मिली संपत्ति की वसीयत नहीं की जा सकती। यह सुप्रीम कोर्ट का फैंसला है।वहीं उत्तर प्रदेश में तहसीलदार को वसीयत रद करने का अधिकार ही नहीं दिया गया है। इस सवाल पर कादीपुर विधानसभा के पूर्व विधायक अधिवक्ता भगेलूराम ने कहा: यह राष्ट्रीय समस्या है। पीड़िता को यह जानकारी अपने क्षेत्र के सांसद और विधायक को देनी चाहिए। वे इस सवाल को लोकसभा और विधानसभा में उठाएंगे। कानून मंत्री को इसका जवाब देना होगा। विधायिका कानून बनाएगी। कानून बन जाने के बाद पैतृक संपत्ति के मामले में वसीयत रद करने का अधिकार सभी तहसीलदारों को मिल जाएगा।
इस संबंध में सोशल मीडिया साइट यूं ट्यूब पर मौजूद साक्ष्यों में कहा गया है कि उत्तराधिकार में मिली संपत्ति का वसीयतनामा नहीं किया जा सकता। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का आदेश उपलब्ध है। फिलहाल
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील के तहसीलदार ने 07 जून 202 को रीना बनाम ईश्वरचंद्र, वाद संख्या 95/98-2022 में कहा:
दोनों पक्षों के साक्ष्य का अध्ययन किया गया। मुझे वसीयत रद करने का अधिकार नहीं है। किसी भी कोर्ट से वसीयत रद करने का साक्ष्य आपत्तिकर्ता ने नहीं दिया है। साक्ष्य में बल नहीं रहने से आपत्तिकर्ता गरिमा पांडेय की आपत्ति खारिज की जाती है।
उल्लेखनीय है आपत्तिकर्ता विधवा गरिमा पांडेय ने प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील अंतर्गत आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के ग्राम सोनपुरा की रहने वाली हैं। उनके पति की मौत हो चुकी है। वहीं उनके ससुर ईश्वरचंद्र पांडेय ने उत्तराधिकार में मिली समस्त संपत्ति मरने से पहले अपनी दो बहुओं के नाम वसीयत कर दिया था। तीसरी बहू गरिमा पांडेय और पांच वर्ष के पोते को पैतृक संपत्ति से ससुर ने वसीयतनामा में वंचित कर दिया है। तहसीलदार पट्टी द्वारा ससुर का वसीयतनामा नहीं खारिज करने पर गरिमा पांडेय का कहना है कि उनके समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें?



















