= 2019 में जिस उत्तर प्रदेश ने बीजेपी को बहुमत हासिल करने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी, वहीं से 2024 के चुनाव में उसे झटका लगा है. लेकिन उत्तर प्रदेश के नतीजे क्यों हैं हर पार्टी के लिए सबक? साथ ही ये भी समझने की कोशिश कि इन नतीजों ने किस नेता का कद बढ़ाया है और किस नेता के नेतृत्व पर सवाल उठा दिए हैं…
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 16जून।
अनादि काल से बाहुबली, प्रभावशाली, सत्ताधीशों से गरीब वर्ग मुकाबला करता आ रहा है। तब से आज तक गरीब वर्ग हार रहा है। लोकसभा चुनाव 2024में भी गरीब वर्ग को हार का सामना करना पड़ा। राहुल गांधी का युवा न्याय और सामाजिक न्याय भी चुनाव हार गया। भ्रष्टाचार की ताकत राक्षसों की ताकत का साथ साथ दे रही है। एक नेता राहुल गांधी इससे लड़ते नजर आए और वे भी हार गए। राहुल गांधी की हार भगवान श्रीराम की हार है। यह बात कांग्रेसियों ने कही।
लोह पुरुष कंम्युनिष्ट नेता राम बरन ने कहा: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने न्याय प्रणाली को सबसे अधिक महत्व दिया था। ग्राम पंचायत में जजों की बैठने की संकल्पना की थी। बपूसुलभ और सस्ते न्याय के हिमायती थे।
वहीं आज मुख्यमंत्री तक को भी सस्ता न्याय सुलभ नहीं है। इसलिए गरीब तबका राहुल गांधी की न्याय यात्रा के साथ लोकसभा चुनाव 2024मेंखड़ा हो गया था लेकिन राहुल गांधी को नहीं जिता सका।
लौह पुरुष राम बरन नेता ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 को अमीरों की जीत कही जा सकती है। न्याय की हार कही जा सकती है।
उन्होंने कहा,न्याय की की हार की मार जितने वालों पर एक दिन भारी पड़ेगी। मानव विकास का इतिहास इसका गवाह है।
सपा नेता सीताराम यादव ने कहा:न्याय की हार प्रभु श्रीराम की हार है। गरीब वर्ग प्रभु श्रीराम के साथ खड़ा होकर रावण की अपराजेय सेना को हरा दी थी। लेकिन 2024 में सभी के लिए न्याय को लेकर शुरू हुआ युद्ध इंडिया गठबंधन हार गया। यह देश की सभी राजनीतिक पार्टियों की हार है।
न्याय की हार ऐतिहासिक घटना है। भारत भूमि पर पहली बार न्याय की हार हुई है। पूरे विश्व की सेना एक तरफ थी। दूसरी तरफ पांडव और भगवान श्रीकृष्ण थे। इस युद्ध के परिणाम से हर भारतीय अवगत हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम से भी हर भारतीय अवगत हैं। इस हार ने गरीब वर्ग की महिलाओं को मात दी जिन्हें न्याय यात्रा की जीत पर शोषण के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए हर वर्ष एक लाख रुपये मिलते। इस एक लाख रुपये से गरीब महिलाएं शोषण के खिलाफ युद्ध लड़ने में सक्षम हो जातीं।
युवा सपा नेता सीताराम यादव ने कहा: गरीब महिलाएं सक्षम नहीं हैं, इसीलिए वे लोकसभा चुनाव 2024 हार गईंं।
उन्होंने कहा: जो भी राजनीतिक दल गरीब महिलाओं को हराने का काम किया है, वह भारत की भावी पीढ़ियों को हराने का काम किया है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने गरीब महिलाओं और पढ़ें लिखे युवाओं को न्याय दिलाने का संकल्प लेकर इतिहास रचने की बुनियाद रखी है जिसकी जीत सुनिश्चित है।
चुनाव के बाद मीडिया के पसंद के मुद्दे :
=अखिलेश यादव ने कैसे बढ़ाया यूपी में अपना कद
=इंजीनियर रशीद कौन हैं: तिहाड़ में बंद बारामूला-कश्मीर से जीत गए लोकसभा चुनाव
=राजस्थान की सबसे युवा सांसद संजना जाटव कौन हैं।
=न्याय का संकल्प,हिस्सेदारी न्याय,युवा न्याय,नारी न्याय,
किसान न्याय,श्रमिक न्याय,
संविधानिक न्याय,सामाजिक न्याय
कांग्रेस पार्टी के उपरोक्त मुद्दों की हार गरीबों की हार है :
कांग्रेस पार्टी किशनगंज के सदर विधायक इजहारुल हुसैन ने कहा:
कांग्रेस पार्टी इंडिया गठबंधन के साथ समाज के पिछड़े, वंचित, पीड़ित और शोषित वर्गों एवं जातियों के हक और अधिकार के लिए सबसे अधिक मुखरता के साथ आवाज़ बुलंद करती रही है। इंडिया गठबंधन लगातार उनकी प्रगति के लिए प्रयास करती रहेगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग देश की आबादी के लगभग 70% हैं, लेकिन अच्छी नौकरियों, अच्छे व्यवसायों और ऊँचे पदों पर उनकी भागीदारी काफी कम है। किसी भी आधुनिक समाज में जन्म के आधार पर इस तरह की असमानता, भेदभाव और अवसर की कमी बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक असमानताओं की इस खाई को कार्यक्रमों के माध्यम से पाटेगी, जिसे लोकसभा चुनाव2024 में बहुमत नहीं मिलने से धक्का लगा है।





















