= पश्चिम बंगाल में शिक्षक नियुक्ति मामले में रिश्वत बटोरने वालों की सूची ईडी ने की तैयार- 35 चिन्हित
वीरेंद्र चौहान बिहार तथा अनिल उपाध्याय, उत्तर प्रदेश, 15जून।
मनरेगा को लूटने वाले भी एक दिन ईडी के जाल में फंसेंगे। अधिकांश ग्राम पंचायतों में मजदूरों के खाते में रुपये डालने और वसूलने का खेल हो रहा है। ये वसूली एजेंट भी ईडी के रडार पर आ सकते हैं। यह जानकारी ग्राम पंचायतों में प्रतिपक्ष की राजनीति कर रहे प्रधान और मुखिया पद के उम्मीदवारों ने दी। ये सभी लोग प्श्चिम बंगाल में कथित शिक्षक नियुक्ति में रिश्वत वसूलने वाले एजेंटों पर ईडी की कार्रवाई की तैयारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर जिले के विकास खंड करौदीकलां और बिहार प्रदेश के पोठिया ब्लाक में मनी लांड्रिंग करके कुछ मुखिया और ग्राम प्रधान अकूत धन एकत्र किए हैं।
उत्तर प्रदेश के विकास खंड करौदीकलां में तो एक ग्राम प्रधान ने रिश्तेदार के नाम से 10चक्का ट्रक खरीदी है।
कहा जाता है कि उक्त ग्राम प्रधान ने चालू वित्तीय वर्ष में 40 लाख रुपये से अधिक राशि मनरेगा पर व्यय किया है। इस दौरान उसके कलेक्शन एजेंट उक्त ग्राम पंचायत में सक्रिय रहे हैं। पुख्ता साक्ष्य के अभाव में ग्राम प्रधान का नाम नजरिया न्यूज नहीं उजागर कर रहा है। पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई से ऐसे ग्राम प्रधान और मुखिया को अवगत होना चाहिए:
कोलकाता, 15 जून। पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के नौकरी भ्रष्टाचार मामले की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो को 35 नए बिचौलियों-सह-कलेक्शन एजेंटों के बारे में जानकारी मिली है। इन्होंने नौकरी लेने वालों और नौकरी लगाने के लिए घूस लेने वालों के बीच मध्यस्थ के रूप में काम किया था।
सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान, सीबीआई के अधिकारियों ने मोटी रकम के बदले स्कूल जॉब्स दिलाने के आरोपित करीब 2300 लोगों से पूछताछ की है।
सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान इन 35 एजेंटों के नाम सामने आए, जिन्होंने उम्मीदवारों और राज्य शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न संगठनों के शीर्ष अधिकारियों के बीच संपर्क बनाने, नौकरी के लिए भुगतान की जाने वाली रकम तय करने, उम्मीदवारों से पैसे इकट्ठा करने और घोटाले के मास्टर माइंड को सौंपने, और घूस देने वालों की नियुक्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सूत्रों ने बताया कि सीबीआई अधिकारियों ने इन बिचौलियों के पिछले रिकॉर्ड की भी जांच की और पाया कि उनमें से कई राजनीतिक संपर्कों के मामले में अपने जिलों में अत्यधिक प्रभावशाली थे। इन सबका नाता सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस से रहा है। जांच अधिकारी इन 35 एजेंटों को बुलाने, उनसे पूछताछ करने और भ्रष्टाचार के मास्टर माइंड के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करने पर विचार कर रहे हैं।
हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जो स्कूल नौकरी मामले में समानांतर जांच कर रहा है, ने एक समाप्त हो चुके पैनल से 222 व्यक्तियों की पहचान की, जिन्हें पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों में शिक्षण नौकरियों के लिए अनुशंसित किया गया था। इन 222 व्यक्तियों में से 183 माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक थे और 38 उच्चतर माध्यमिक शिक्षक थे।
ईडी ने पाया है कि इन 222 व्यक्तियों में से अधिकांश की नियुक्ति के लिए एसपी सिन्हा द्वारा सिफारिश की गई थी, जो उस समय पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की स्क्रीनिंग कमेटी के प्रमुख थे। स्क्रीनिंग कमेटी का गठन आयोग द्वारा पार्थ चटर्जी के शिक्षा मंत्री के कार्यकाल के दौरान किया गया था। स्कूल नौकरी मामले में संलिप्तता के कारण पार्थ वर्तमान में जेल में हैं।






















