भरगामा।
कालांतर में शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में पेड पौधों की हरियाली ज्यादा रहती थी। लेकिन आधुनिकता के दौर में ग्रामीण क्षेत्र से भी पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होने से पर्यावरण पर संकट मंडराने लगा है।
विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस पर भरगामा प्रखंड में जगह-जगह पौधा लगाकर लोग अपनी जिम्मेदारी समझने लगे हैं इसी कड़ी में समाजसेवी अशोक कुमार सिंह व उनकी पत्नी ने रूद्राक्ष का पौधा लगाकर बताया इस पौधे में कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण की क्षमता अधिक होती है। बताया हर मनुष्य को किसी भी उपलक्ष में एक पौधा जरूर लगाना चाहिए जिससे पर्यावरण संरक्षण हो सके। उन्हौने कहा प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और मानव जीवनशैली के लिए इनके गलत उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। दूषित पर्यावरण उन घटकों को प्रभावित करता है, जो जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं। ऐसे में पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने, प्रकृति और पर्यावरण का महत्व समझाने के उद्देश्य से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं।
पर्यावरण का अर्थ संपूर्ण प्राकृतिक परिवेश से है जिसमें हम रहते हैं। इसमें हमारे चारों ओर के सभी जीवित और निर्जीव तत्व शामिल होते हैं, जैसे कि हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे, जानवर और अन्य जीव-जंतु। पर्यावरण के घटक परस्पर एक-दूसरे के साथ जुड़कर एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं।
पंचायत समिती सदस्य गुड्डू यादव ने बताया मनरेगा योजना अंतर्गत चार वर्षो में धनेश्वरी पंचायत में सड़क किनारे एवं सरकारी भूमि पर 25 हजार पौधा लगाया गया है जिसमें से 95% पौधे आज विशाल पेड़ के रूप में परिणत हो गया है जिससे क्षेत्र हरा-भरा दिखने लगा है और प्रदूषण भी काफी काम हुआ है उन्होंने कहा भारत समेत पूरे विश्व में प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। बढ़ते प्रदूषण के कारण प्रकृति खतरे में हैं। प्रकृति जीवन जीने के लिए किसी भी जीव को हर जरूरी चीज उपलब्ध कराती है। ऐसे में अगर प्रकृति प्रभावित होगी तो जीवन प्रभावित होगा। प्रकृति को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत हुई।
इस दिन लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाता है और प्रकृति को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रेरित किया जाता है।






















