- सभी मानव जाति को एक सूत्र मे पिरोने के लिए चैतन्य महाप्रभु ने हरिनाम संकीर्तन किये थे शुरू
- रोजाना महाअष्टयाम में हजारों भक्तगण भंडारा का प्रसाद ग्रहण
- दर्जनों किर्तन मंडली महाअष्टयाम में लिये है भाग,दिखाया जा रहा है आकर्षक झांकी
नजरिया न्यूज अररिया। अररिया के स्वर्ग स्थल बाबाजी कुटिया स्थित हनुमान मंदिर में चल रहे महाअष्टयाम संकीर्तन से पूरे शहर का वातावरण भक्तिमय है। यह आयोजन रविवार को समापन होगा।यह महाअष्टयाम मां खड्गेश्वरी महाकाली के साधक नानु बाबा के अध्यक्षता में किया जा रहा है।नानु बाबा को देखकर चैतन्य महाप्रभु का याद ताजा हो जाता हैं।भक्तों को बाबाजी कुटिया में स्वर्ग का आनंद मिलता है।इस कारण अधिक से अधिक समय भक्तगण महाअष्टयाम में बीताते है।वही मंदिर व आस पास के क्षेत्रों को सुंदर आकर्षक रूप से सजाया गया है।
बाबाजी कुटिया में संध्या काल श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है। कीर्तन मंडली अपने साथ छोटे छोटे बच्चों को भी लेकर आती है और उनका मनमोहक नृत्य माहौल को आकर्षक भक्तिमय बना देता है।खासकर संध्या काल कीर्तन मंडली में शामिल विभिन्न देवी देवताओं, भूत पिचाश एवं पवनसुत के वेश में बाल नर्तकों की गतिविधि महाअष्टयाम में चार चांद लगा देते है। उनके नृत्य पर श्रोता व दर्शक भाव विभोर होकर झूम उठते हैं।नानु बाबा के शिष्य हेमंत कुमार हीरा ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु वैष्णव धर्म के प्रचारक और भक्तिकाल के साथ ही महान संत और प्रमुख कवियों में एक हैं।
चैतन्य प्रभु ने ही वैष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखी।जात-पात की जंजीर को तोड़ने और सभी मानव जाति को एक सूत्र मे पिरोने के लिए चैतन्य महाप्रभु ने हरिनाम संकीर्तन आंदोलन की भी शुरुआत की।विलुप्त होते वृंदावन को फिर से बसाने में भी चैतन्य महाप्रभु का अहम योगदान रहा है।ठीक इसी प्रकार नानु बाबा सभी धर्मों के लिए मिशाल है व उन्हें देखकर चैतन्य महाप्रभु का याद आ जाती है।






















