कोट:
.एक एसआईटी का गठन करना पड़ेगा. सरकार ये काम खुद करे इसका कोई रास्ता नहीं है. इसलिए इसे सिर्फ़ कोर्ट के मार्फ़त करना होगा.
मदन लोकुर
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी, नजरिया न्यूज, 03अप्रैल।
कहीं इलेकट्रोल बॉन्ड्स के बदले कोई लेन देन तो नहीं हुआ, जैसे कि केंद्र और राज्य के स्तर पर ठेका मिलना या ईडी जैसी जांच एजेंसियों की पूछताछ का बंद होना। कांग्रेस पार्टी ने पिछले महीने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मांग की थी कि इस बात की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की जानी चाहिए कि इलेक्टोरल बॉन्ड्स के बादले कहीं केंद्र की ओर से कोई पक्षपात वाली कार्रवाई तो नहीं की गई।
कपिल सिब्बल जैसे क़ानूनी विशेषज्ञों और एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स जैसे पारदर्शिता का अभियान चलाने वाले संगठनों ने भी इसी तरह की जांच की मांग की है।
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की ओर से साझा किए गए डेटा से कई ट्रेंड्स का पता चलता है।
कई ऐसी रिपोर्टें हैं जिनमें कहा गया है कि डोनेशन का समय संदेह पैदा करता है।
*उदाहरण के लिए* :
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, एजेंसियों की जांच का सामना कर रही 26 कंपनियों में से 16 कंपनियों ने जांच शुरू होने के बाद राजनीतिक पार्टियों को चंदा दिया और छह कंपनियों ने जांच के बाद और अधिक बॉन्ड ख़रीदे।
इलेक्टोरल बॉन्ड्स के मुकदमे से जुड़े वकीलों में से एक प्रशांत भूषण के मुताबिक 33 ग्रुपों ने भारतीय जनता पार्टी को लगभग पौने दो हज़ार (1750) करोड़ रुपये चंदा दिया और इन कंपनियों को 3.7 लाख करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला।
प्रशांत भूषण ने दावा किया कि 30 शेल कंपनियों ने क़रीब 143 करोड़ रुपये क़ीमत के इलेक्टोरल बॉन्ड्स दिए।
*एक समाचार संगठन रिपोर्टर्स कलेक्टिव के मुताबिक़:*
इलेक्टोरल बॉन्ड्स के ज़रिए चंदा देने वाले शीर्ष 200 दाताओं में से 16 ने अपनी कंपनियों के लगातार तीन साल तक घाटे में रहने के बावजूद इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे।
विभिन्न सेक्टरों में व्यक्तिगत भुगतानों को लेकर भी संदेह खड़े होते हैं, जैसे बैंकिंग, रीयल इस्टेट और टेलीकॉम।
कुल क़रीब साढ़े 16 हज़ार करोड़ (16,492) रुपये के ख़रीदे गए बॉन्ड्स में बीजेपी को सवा आठ हज़ार (8,252) करोड़ रुपये, कंग्रेस को क़रीब दो हज़ार (1,952) करोड़ रुपये और टीएमसी को 1705 करोड़ रुपये मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड्स मिले।
इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदना अपने आप में कोई ग़ैरक़ानूनी नहीं बात है, क्योंकि जब ये ख़रीदे गए थे तो यह एक वैध योजना थी।
वरिष्ठ वकील और क्रिमिनल लॉ के एक्सपर्ट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा:
, “एक वैध स्कीम के तहत हुआ भुगतान अपने आप में भ्रष्टाचार नहीं माना जा सकता.”
यह क़ैरक़ानूनी तब होगा जब एक व्यक्ति या कंपनी एक पार्टी को चंदा दे और इसके बदले वो पार्टी उनके हित में कुछ करे।
*लूथरा कहते हैं:*
, “इसलिए, आपको पहले ये साबित करना होगा कि जो भुगतान हुए उसका संबंध किसी लाभ से जुड़ा है।इसके लिए या तो एक राजनीतिक पार्टी सत्ता में हो या लाभकारी फैसले करवाने की उसमें क्षमता हो।
*पारदर्शिता का अभियान चलाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज ने कहा :*
“एक विस्तृत जांच” करानी होगी क्योंकि “कोई भी ये नहीं कहने जा रहा कि उन्होंने किसी ग़लत काम के लिए बॉन्ड दिए या स्वीकार किए।
वो कहती हैं कि इन चीजों की जांच की जानी चाहिए कि कहीं केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कंपनियों को बॉन्ड्स ख़रीदने के लिए तो नहीं किया गया, या कहीं उन कंपनियों या व्यक्तियों ने बॉन्ड तो नहीं खरीदे जिनसे पूछताछ हो रही थी और इसके बाद उनके ख़िलाफ़ लगे मामले ठंडे बस्ते में तो नहीं डाल दिए गए या वापस ले लिये गए।
अंजली भारद्वाज ने जोड़ा कि लेन देन के आरोपों को भी देखे जाने की ज़रूरत है, जैसे क्या बॉन्ड्स ख़रीदने के बदले कॉन्ट्रैक्ट दिए गए थे।
संसार एक रंगमंच:
*सोशल मीडिया पर हेड लाइन की सूची :*
=पहले मैं ईडी की समस्या से पीड़ित था फिर किसी ने मुझे बीजेपी के विषय में बताया:कवि सम्मेलन। आखिर ये ईडी है-क्या?अब सुप्रीम कोर्ट ने उठाए ईडी की जांच पर सवाल। ईडी की जांच के चमत्कारी खेल। केजरीवाल के खुलासे से फंस गई ईडी। ईडी को किस बात पर लगी तगड़ी फटकार। केजरीवाल को आज मिलेगी जमानत। ईडी अधिकारी रिश्वत लेने आया था विजिलेंस धर लिया। ईडी का इतिहास नेहरू से मोदी तक।मनीष सिसोदिया गिरफ्तार, सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, संजय सिंह गिरफ्तार, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार।
ईडी पर भरोसा कौन करेगा। संजय सिंह जेल से बाहर।





















