नजरिया न्यूज बारसोई कटिहार।
प्रखंड के आबादपुर क्षेत्र अंतर्गत जीविका द्वारा संचालित एक स्वयं सहायता समूह अरशिता के सीएम ईशमत आरा परवीण द्वारा धोखे से अंगूठा निशान लेकर राशि की निकासी कर ली है। ऐसा आरोप दो महिलाओं ने प्रखंड विकास पदाधिकारी हरिओम शरण को आवेदन देकर की है। वहीं इस संबंध में एक पीड़िता धूमटोला निवासी निहार खातून ने लिखा है कि मैं जीविका द्वारा संचालित सेल्फ हेल्फ ग्रुप का सदस्य हूं। वहीं मेरे ग्रुप के सीएम ईशमत आरा परवीण ने धोखे से मेरे बांऐं हाथ के अंगूठे का निशान लेकर पिछले वर्ष दिसंबर महीना के 31 तारीख को 48 हजार रुपए कि निकासी कर ली है। और इस बात कि किसी को भनक भी नहीं लगी। जब दो-तीन महीने बाद मुझे रुपए की जरूरत पड़ी तो सचिव रुखसाना खातून को मैंने रुपए निकलने के संबंध में कहा तो उन्होंने चौंकाने वाली जानकारी देते हुए बताया कि तुम्हारे नाम से 48 हजार रुपए के निकासी सीएम ईस्मत आरा परवीन के द्वारा पहले ही कर लिया गया है। जबकि इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। वहीं इसी सेल्फ हेल्प ग्रुप और इसी गांव की दूसरी पीड़ित महिला शाहनूरा खातून ने भी प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन देकर अपने समूह के सीएम के खिलाफ कार्रवाई करने कि गुहार लगाते हुए लिखा है कि दो बार में बारी बारी से 24 000 हजार एवं 10000 रुपए ग्रुप कि सीएम ईशमत आरा परवीन ने मेरे फर्जी अंगूठा निशान के द्वारा निकासी कर ली है इस संबंध में रुपए की जरूरत पड़ने पर जब समूह के सचिव रुखसाना खातून के पास राशि मांगने के लिए गया तो उनके द्वारा बताया गया कि आपके नाम से दो बार में 34 हजार रुपए कि निकासी कर ली गई है। बता दें कि यह मामला सिर्फ दो सदस्य महिला का ही नहीं है बल्कि क्षेत्र के अनेकों ग्रुप के दर्जनों महिला का है। इस प्रकार का फर्जीवाड़ा अनेकों ग्रुप में किया गया है।
परंतु लोगों को सीधे तौर पर इसकी जानकारी नहीं है। जरूरत पड़ने पर जब रुपए की निकासी करने के लिए सदस्य ग्रुप में जा रहे हैं तब उन्हें फर्जीवाड़ा का पता चल रहा है। वही मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी हरिओम कुमार शरण ने जीविका के बीपीएम निक्की सेठिया को 3 दिन के अंदर जांच कर रिपोर्ट देने की सख्त हिदायत दी है। वहीं इस संबंध में पूछे जाने पर बीपीएम श्रीमती सेठिया ने कहा कि मैंने इस संबंध में मंगलवार को धूमटोला जाकर जानकारी की तो पता चला कि गलती दोनों ओर से की गई है मामला अधिक रुपए का नहीं था सीएम ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी नामा लिखा है और पीड़िता को उनके रुपए वापस कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस संबंध में रिपोर्ट प्रखंड विकास पदाधिकारी को सौंप दिया जाएगा।वहीं सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि सेल्फ हेल्प ग्रुप के पदाधिकारी की बैंक एवं सीएसप के कर्मियों से मिली भगत होती है। इसी के तहत ऋण वाली पंजी में सदस्य से हस्ताक्षर नहीं कराया जाता है।तथा ऋण स्वीकृत हो जाने के उपरांत भुगतान के समय जीविका के पदाधिकारी बैंक में मौजूद हो जाते हैं। तथा निकासी के समय सदस्यों के राशि से रकम काट कर भुगतान किया जाता है।





















