– ईडी ने नहीं किया विरोध- सुप्रीम कोर्ट ने जमानत का विरोध करने का कारण पूछते हुए इंट्ररवल बाद तलब किया था जवाब
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज,02अप्रैल।
आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से आज वेल मिल गई। ईडी ने उन्हें कथित दिल्ली शराब नीति मामले में मनी लांड्रिंग ऐक्ट तहत लगभग छह महीने पहले गिरफ्तार किया था। तब से वे जेल में थे। आज उन्हें जमानत मिल गई।
संजय सिंह के अधिवक्ता के अनुसार, इंटरवल के सुप्रीम कोर्ट के माननीय तीन जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। ईडी के वकील को इंटरवल बाद जमानत का विरोध करने का कारण के पक्ष में तर्क रखने के लिए कहा।
इससे पहले माननीय तीन सदस्यीय बेंच ने अपनी तरफ से जमानत के विरोध करने के कारणों पर सख्त संदेश ईडी को दिया था।
मनी लांड्रिंग कानून:
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2019 में केंद्र सरकार ने 2002 के मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में व्यापक बदलाव किया, जिससे क़ानून का दायरा काफ़ी बढ़ गया था. यह क़ानून शुरू से ही सख़्त था लेकिन क़ानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक नए प्रावधानों ने इसे और कठोर बना दिया गया है।
संशोधन के बाद मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एफ़आईआर के बिना भी जांच शुरू कर सकती है।
इसके अलावा क़ानून का दायरा बढ़ा दिया गया है. अपराध से प्रत्यक्ष तौर पर सीधा जुड़ाव नहीं होने पर भी, अगर आपके पास उस अपराध से लाभ पहुंचा है तो यह दंडनीय अपराध होगा।
मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने साल 2017 में ज़मानत के लिए कुछ शर्तों को रद्द कर दिया था जिनके आधार पहले किसी अभियुक्त को जमानत मिल जाती थी।
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इन शर्तों के तहत अभियुक्त के ज़मानत पर रहने के दौरान कोई अपराध करने की आशंका न होने पर ज़मानत दे दी जाती थी।
हालांकि, साल 2019 में इन शर्तों को फिर से लागू कर दिया गया. लेकिन 2022 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2017 में किए गए बदलावों को फिर से लागू कर दिया।
इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों सहित क़ानूनी विशेषज्ञों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा और वर्तमान में इसकी समीक्षा की जा रही है।
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वैसे इस क़ानून का इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है. 2018 में ईडी ने 195 मामले दर्ज किए, जबकि 2020 में 981 मामले दर्ज किए।
2004-14 के दस साल की मनमोहन सरकार के दौरान ईडी ने 5,436 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की और 104 आरोपपत्र दाख़िल किए. जबकि बीते 2014 से 2022 के आठ सालों में ईडी ने 99,356 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है और इस दौरान 888 आरोपपत्र दाख़िल किए हैं।
ईडी की वेबसाइट के मुताबिक, जनवरी, 2023 तक मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों के तहत केवल 45 लोगों को दोषी पाया गया है।
इस क़ानून के तहत विपक्ष के कई नेताओं, व्यापारियों और सिविल सोसायटी के सदस्यों को जेल में डाला गया है।





















