सरकारी गवाह की जमानत का विरोध ईडी क्यों नहीं की?राजद एक मात्र राजनीतिक दल है, जो 2019से सड़क पर प्रदर्शन कर रही है कि देश में कानून का शासन खत्म किया जा रहा है, इलेक्ट्रोल बॉन्ड असंवैधानिक घोषित करना राजद द्वारा 2019में किया गए प्रदर्शनों की जीत है,मनी लांड्रिंग कानून के भय से हजारों करोड़ का इलेक्ट्रोल बॉन्ड खरीदकर दान देने को मजबूर हुए उद्योगपति निश्चित रूप से मनी लांड्रिंग कानून को भी असंवैधानिक घोषित किए जाने का इंतजार कर रहे होंगे:मीडिया रिव्यू
दुर्केश सिंह/अनिल उपाध्याय, नजरिया न्यूज,28मार्च।
पहले जानते हैं मनी लांड्रिंग कानून क्या है:
मनी लॉन्ड्रिंग का सरल उदाहरण क्या है?
एक आपराधिक या आपराधिक संगठन एक वैध रेस्तरां व्यवसाय का मालिक है। अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन धीरे-धीरे रेस्तरां के माध्यम से बैंक में जमा किया जाता है। रेस्तरां दैनिक नकद बिक्री की रिपोर्ट करता है जो वास्तव में नकद बिक्री से कहीं अधिक है। दूसरा उदाहरण:
मनी लॉन्ड्रिंग में वित्तीय परिसंपत्तियों को छिपाना शामिल है ताकि उनका उपयोग उस अवैध गतिविधि का पता लगाए बिना किया जा सके जिसने उन्हें उत्पन्न किया था। मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से, अपराधी आपराधिक गतिविधि से प्राप्त मौद्रिक आय को स्पष्ट रूप से कानूनी स्रोत के साथ धन में बदल देता है। तीसरा उदाहरण:
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का अनुमान है कि भारत में सालाना 5 ट्रिलियन मूल्य की अवैध धनराशि का शोधन किया जाता है , जिससे अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ता है। कितने वर्ष की सजा है:
भारतीय संसद ने वित्तीय अपराधों को रोकने और वित्तीय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट बनाया है। इस कानून के तहत वित्तीय अपराध करने वाले को तीन साल से सात साल तक की कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।इसके अलावा आरोपी पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उसकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर चल रहा विमर्श:
मनी लांड्रिंग कानून को भारतीय संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ क्यों माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर दूसरा बड़ा समाचार यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति ने इलेक्ट्रोल बॉन्ड को हिंदुस्तान का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया है।
सोशल मीडिया पर देश के शीर्ष बुद्धिजीवियों का कहना है कि जो खुले में रिश्वत ले रहा है, उसके खिलाफ ईडी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है लेकिन जिनके खिलाफ कोई डाक्यूमेंट्री प्रूफ नहीं है, उनको गिरफ्तार कर रही है। जांच को लटकाए रखी है। ट्रायल नहीं होने दे रही है।
राजद एक मात्र राजनीतिक दल है, जो 2019से सड़क पर प्रदर्शन कर रही है कि देश में कानून का शासन खत्म किया जा रहा है। इलेक्ट्रोल बॉन्ड असंवैधानिक घोषित करना राजद द्वारा 2019में किया गए प्रदर्शनों की जीत है। मनी लांड्रिंग कानून के भय से हजारों करोड़ का इलेक्ट्रोल बॉन्ड खरीदकर दान देने को मजबूर हुए उद्योगपति निश्चित रूप से मनी लांड्रिंग कानून को भी असंवैधानिक घोषित किए जाने का इंतजार कर रहे होंगे। फिलहाल मनी लांड्रिंग कानून संवैधानिक है या असंवैधानिक इसका निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है। लेकिन, प्राकृतिक न्याय के अनुकूल ऐसा कानून कत्तई नहीं हो सकता है जिसके डर से उद्योगपति चुपचाप हजारों करोड़ रुपये राजनीतिक दलों को देने के लिए विवश हो जाएं। नेता अपना दल त्याग करके दूसरे दल में शामिल हो जाएं। जनार्दन रेड्डी हाल ही में कांग्रेस पार्टी का त्याग किया है। कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार के पक्ष में नहीं है लेकिन भ्रष्टाचार की आड़ में उत्पीड़न के पक्ष में भी लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई व्यक्ति नहीं होगा!
यह कौन सी क्रोनोलोजी है, राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू होती है तो झारखंड के मुख्यमंत्री को गिरफतार कर लिया जाता है। नीतीश कुमार को भाजपा में शामिल होना पड़ता है, कांग्रेस पार्टी का बैंक खाता फ्रीज कर दिया जाता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफतार कर लिया जाता है। क्या कांग्रेस का बैंक खाता लोकसभा इलेक्शन बाद नहीं फ्रीज किया जा सकता था। संपूर्ण विपक्ष में जो नेता भाजपा में शामिल हो गए वे ईमानदार हैं? जबकि ऐसे अधिकांश नेताओं पर गंभीर आरोप हैं। क्या लोकसभा चुनाव 2024को विपक्ष विहीन बनाने की रणनीति तैयार की गई है?
फिलहाल हाईकोर्ट दिल्ली ने ईडी को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले में नोटिस दिया है। सोशल मीडिया इसे बहुत बड़ी पहल मान रही है। क्रोनोलोजी को माननीय न्यायमूर्ति भी समझ रहे हैं, जिन 100लोगों का टिकट कट गया है उनके लाखों समर्थक भी समझ रहे हैं। बुद्धिजीवी भी समझ रहे हैं। इस क्रोनोलोजी पर बार-बार चर्चा करने से चर्चा करने वालों को भी शर्म आने लगी है।ऐसी खबरें रोज आ रही हैं। पता नहीं करने वालों की जमीर कैसे एलाउ करती होगी? क्रोनोलोजी स्पष्ट है, विपक्ष इलेक्शन नहीं लड़े! इसीलिए आरोप लग रहा है कि देश में अनकही इमरजेंसी है। अनकही इमरजेंसी कवर करने वाले पत्रकारों का गला दबाया जा रहा है, जिससे वे मर जाएं! दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दल नहीं बदले तो जेल में डाल दिया गया। 1975गिरफ्तार सभी नेताओं को 1977के लोकसभा चुनाव के समय जेल से रिहा कर दिया गया था, आज 2024के लोकसभा चुनाव के समय विपक्ष के नेताओं को गिरफतार किया जा रहा है। क्या इन सभी को लोकसभा चुनाव 2024 संपन्न होने के बाद गिरफ्तार नहीं किया जा सकता था? क्या देश छोड़कर ऐसे नेता भाग जाएंगे?मेन स्ट्रीम मीडिया का हिंदी अखबार मत पढ़िए।ये कुछ भी नहीं बताने के लिए अखबार निकाल रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के वकीलों ने 27 मार्च को जो सवाल रखा, उसका ईडी के पास कोई जवाब नहीं था। जवाब देने के लिए ईडी को कोर्ट ने चार दिन का समय दिया है। गजब की बात सैकड़ों रेड, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, जैन और संजय सिंह को गिरफतार करने वाली ईडी के पास अरविंद केजरीवाल के वकीलों के सवाल का कोई जवाब नहीं है! हाईकोर्ट ने ईडी से सवाल किया है आज जिस मामले की सुनवाई हो रही है, उसमें ईडी की कार्रवाई से लोकतंत्र पर सवाल है!इस बात का हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। ईडी को हाईकोर्ट ने एक सप्ताह का समय दिया है। दो अप्रैल तक ईडी को जवाब जमा करना है।तीन अप्रैल को हाईकोर्ट अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर अपना फैंसला सुनाएगा।
उल्लेखनीय है कि जिस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफतार किया गया है, उसका परिस्थितिजन्य सरकारी गवाह शरदचंद्र को ईडी मुजरिम बनाई थी। वह करोड़ों रुपये का इलेक्ट्रोल बॉन्ड खरीदकर भाजपा को दिया है। उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई के समय ईडी इसलिए चुप रही, क्योंकि उसकी कमर में दर्द था। जमानत के बाद वह सरकारी गवाह बन जाता है।





















