=पिछले वर्ष सात लाख रुपये व्यय करने में असफल ग्राम पंचायत अमरेमऊ ने छलांग लगाते हुए नौ लाख रुपये से अधिक व्यय करने का कायम किया रिकॉर्ड, लौदा ने भी तोड़ा गत वर्ष के व्यय का रिकॉर्ड
=संविधान भेदभाव करने की नहीं देता अनुमति- सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का कार्य एक समान, वेतन हैअसमान
अनिल उपाध्याय, पूर्वांचल ब्यूरो, नजरिया न्यूज, 13मार्च।
सार्वजनिक व्यय ग्राम सरकार द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने और जनता को सुविधाएं प्रदान करने के लिए धन के परिव्यय निर्भर है। इसमें बुनियादी ढांचे के विकास में व्यय रुपयों का सबसे बड़ा योगदान है।
एक अध्ययन के मुताबिक सुल्तानपुर जिले की ग्राम पंचायत
अमरेमऊ ने 34.13लाख में 32.17लाख रुपये वित्तीय वर्ष 2023-24 में आज तक व्यय किया है। विकास खंड करौलीकलां की यह ग्राम पंचायत
30.73लाख में 23.72लाख रुपये 2022-23 व्यय किया था। ग्राम पंचायत कि सबसे बड़ी उपलब्धि यह है गत वित्तीय वर्ष के सापेक्ष चालू वित्तीय वर्ष में सार्वजनिक व्यय में नौ लाख रुपये की वृद्धि हुई है।
जौनपुर जिला में विकास सुइथाकला:
लौदा ग्राम पंचायत ने 18.53लाख रुपये में 16.40लाख रुपये 2023-24में बुनियादी ढांचों के विकास पर व्यय किया है, जो गत वितरित वर्ष से लगभग आठ लाख रुपये अधिक है। ग्राम पंचायत लौदा के गत वर्ष के रिकॉर्ड के अध्ययन से पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2022-23में 13.67लाख रुपये में 8.32लाख रुपये व्यय किया गया था।
ग्रामीणों की टिप्पणी:
विकास खंड करौदीकलां में स्थित ग्राम पंचायत अमरेमऊ का ग्राम प्रधान के नेतृत्व में अभूतपूर्व विकास हो रहा है। विकास खंड सुइथाकलां के ग्रामीणों के अनुसार वे लोग विकास कार्यों से असंतुष्ट हैं। मुख्य सड़क से हर घर तक सडक नहीं है। सरकारी अस्पताल भी सड़क से नहीं जुड़ा है। ग्राम पंचायत लौदा में सांसद और विधायक निधि से कोई काम नहीं हुआ है। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के संविधान के सपनों से लौदा ग्राम पंचायत बहुत दूर है।
लौदा ग्राम पंचायत के शिक्षकों की टिप्पणी:
समान वितरण का सिद्धांत से ही एक समान विकास होगा। यह सिद्धांत संविधान में है।लोक व्यय नीति को देश के सभी क्षेत्रों और वर्ग के संतुलित विकास को सुनिश्चित करने के लिए समान वितरण के सिद्धांत का पालन नहीं हो रहा है। यह गरीबों और हाशिए पर जी रहे वर्ग के लोगों का सपना है। शिक्षक वर्ग भी भेदभाव के शिकार हैं। दो तरह के वेतन हैं जिसमें एक का नाम मानदेय रख दिया गया है। बा साहब भीमराव अम्बेडकर ऐसे कानून के हिमायती नहीं थे।





















