=मान्यवर कांशीराम और बाबा साहब के जीवन को आत्मसात करने वाले मुशहर समाज के एक्टिविस्ट हरीराम वनवासी को भारत रत्न नहीं मिलने से दलित समाज दुखी
*दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी, नजरिया न्यूज, 12मार्च।*
मान्यवर कांशीराम और भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के जीवन को आत्मसात करने वाले मुशहर समाज के एक्टिविस्ट हरीराम वनवासी को भारत रत्न क्यों नहीं मिला ? दोनों के कार्य विश्व प्रसिद्ध सम्मान नोबल पुरस्कार से नवाजे गईं विभूतियों से भी अधिक मानवीय हैं।
यह स्वाभिमान दलित और मुसहर समाज के बुद्धिजीवियों में है।
दलित समाज के बुद्धिजीवियों की माने तो भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित महान विभूतियों ने जो योगदान मानवीय सेवा के क्षेत्र में दिया है, उससे कहीं बड़ा योगदान सोए हुए समाज की चेतना जगाने में मान्यवर कांशीराम तथा मुशहर समाज के सोशल एक्टिविस्ट उतर प्रदेश सरकार द्वारा एकाउंटेंट पद से बर्खास्त कर दिए गए मुसहर हरीराम वनवासी की है।
नोबल पुरस्कार से सम्मानित मदर टेरेसा और भारत रत्न से सम्मानित श्रीमती इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, कर्पूरी ठाकुर, लालकृष्ण आडवाणी और चौधरी चरण सिंह पर देश के दलित बुद्धिजीवियों को गर्व है। लेकिन
मान्यवर कांशीराम और मुशहर समाज के एक्टिविस्ट हरीराम वनवासी को नोबेल पुरस्कार और भारत रत्न सम्मान नहीं मिलने से दलित समाज के बुद्धिजीवी दुखी हैं। दलित समाज के बुद्धिजीवियों को बहन मायावती के प्रधानमंत्री बनने पर मान्यवर कांशीराम और दलित एक्टिविस्ट हरीराम वनवासी को भारत रत्न सम्मान मिलने की उम्मीद है।
कोट:
जीवन लंबा होने की बजाए महान होना चाहिए। कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है और जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा जरूर दी जानी चाहिए। एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है। मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए। इस कसौटी पर मान्यवर कांशीराम और हरीराम जीवन खरा उतरता है।
=भगेलूराम, बसपा से तीन बार विधायक
कोट:
जब हम एक-दूसरे से हंसते हुए, मुस्कुराते हुए मिलते हैं, तो असल में यही प्रेम की शुरुआत है।
प्रेम कभी कोई नाप-तोल कर नहीं करता है। अगर आप 100 लोगों को नहीं खिला सकते हैं, तो एक को ही खिलाइए पर शुरुआत जरूर कीजिए। नोबल पुरस्कार सम्मानित मदर टेरेसा के इस संदेश पर मान्यवर कांशीराम और मुसहर समाज के एक्टिविस्ट हरीराम वनवासी का जीवन खरा उतरता है।
=सीताराम, सेवानिवृत आदर्श शिक्षक, कमरावां, कादीपुर, सुलतानपुर।
कोट:
साहस के बगैर आप कोई अच्छा काम नहीं कर सकते हैं। आप के पास अलग-अलग तरह के साहस होने चाहिए। पहला साहस तो बौद्धिकता का साहस है। आपको विभिन्न मूल्यों से छांटकर पता करना है कि कौन सा आपके लिए सही है जिसका आपको पालन करना चाहिए। आपको अपने रास्ते में आने वाली चीजों के खिलाफ खड़े होने का नैतिक साहस चाहिए। भारत रत्न श्रीमती इंदिरा गांधी के उक्त संदेश पर मान्यवर कांशीराम और मुसहर समाज के एक्टिविस्ट हरीराम वनवासी का जीवन आलोकित है।
सीताराम राही, सेवानिवृत्त कोआपरेटिव सचिव, मझिगवां, कादीपुर, सुलतानपुर।





















