स्टेट बैंक ऑफ इंडिया चाहे तो खरीदारों के नाम तुरंत बता सकती है: मीडिया रिव्यू
= =पकड़ा गया एसबीआई का खेल:रविश कुमार
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज07 मार्च।
सुप्रीम कोर्ट में स्टेट बैंक आफ इंडिया का आवेदन: इलेक्ट्रोल बॉन्ड खरीदने वालों का नाम बताने के लिए 30जून तक समय दे दिया जाए। राहुल गांधी की मध्यप्रदेश में भारत जोड़ो न्याय यात्रा तथा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का स्टेट बैंक की जमकर खिंचाई का मामला सोशल मीडिया पर आज छाया रहा । सोशल मीडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के आवेदन को लोकसभा चुनाव से पहले इलेक्ट्रोल बॉन्ड खरीदने वालों के नाम छुपाने की कहानी कोशिश के तौर पर देखी गई। न्यूज लांच ने लोकसभा चुनाव 2024के बाद भारत का भविष्य कैसा होगा?भारत का लोकतंत्र कैसा होगा? एक वर्ष में कितनी सरकारी नौकरियां मिलेंगी, इस बिंदु को लेकर इंडिया एलांयस की नीति की चर्चा की।
मध्यप्रदेश के पत्रकार ने सोशल मीडिया चैनल पर राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर आयोजित विमर्श में युवा क्या चाहता है। किसान क्या चाहते हैं। सरकारी कर्मचारी क्या चाहते हैं, देश में किस पार्टी की सरकार बनेगी इत्यादि विषयों पर बातचीत कर रहे थे।
वहीं ख्यातिलब्ध चिन्तक और पत्रकार रविश कुमार की चिंता का विषय स्टेट बैंक आफ इंडिया का वह आवेदन था जिसमें सुप्रीम कोर्ट से इलेक्ट्रोल बॉन्ड खरीदने वालों के नाम 30जून के बाद देने के लिए दायर याचिका थी।
इस मामले में स्टेट बैंक आफ इंडिया के कर्मचारी संगठन फेडरेशन आफ इंडिया ने प्रेस नोट जारी करके सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए समय 13 मार्च की समय-सीमा के पहले इलेक्ट्रोल बांड खरीदने वाले का नाम सार्वजनिक करने की मांग की है।
फिलहाल स्टेट बैंक चाहता है कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले 160अरब रुपये किसने -किसने दिया, उनके नाम का पता देश को नहीं चले,इसकी जुगाड़ में है।
30जून के बाद स्टेट बैंक इलेक्ट्रोल बॉन्ड खरीदने वालों के नाम की जानकारी चुनाव आयोग को देना चाहता है।
इस पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए सोशल मीडिया ने प्रतिकार किया: तबतक पता चल चुका होगा देश में किस पार्टी की सरकार बन रही है।
फिलहाल स्टेट बैंक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 22217बांड, प्राप्त करने वाले और खरीदने वालों की दो अलग-अलग सूचियां हैं। इसे तैयार करने के लिए 13मार्च तक का समय कम है। इसके लिए 30जून तक समय दिया जाए।
उल्लेखनीय है कि 15फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रोल बॉन्ड कानून को असंवैधानिक घोषित किया था। स्टेट बैंक को 21दिनों में इलेक्ट्रोल बॉन्ड खरीदने वालों के नाम की जानकारी देने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था।
यूट्यूब पर ख्यातिलब्ध पत्रकार रविश कुमार-पकड़ा गया एसबीआई का खेल, सरकार को दिया था चंदे का डिटेल:
चुनावी चंदे पर नजर रखने वाली संस्था एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी है। एडीआर के वकील प्रशांत कुमार ने मांग की है कि स्टेट बैंक आफ इंडिया पर अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए। स्टेट बैंक ने जानबूझकर सुप्रीम के आदेश का अनुपालन नहीं किया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मांग को चुनौती देते हुए अधिवक्ता प्रशांत कुमार ने कहा हैं: यह पूर्ण रूप से दुर्भावना पूर्ण है। यह पारदर्शिता के प्रयासों को विफल करने की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रोल बांड खरीदारी की रिपोर्ट तैयार करने का ढांचा स्टेट बैंक के पास मौजूद हैं। बैंक ने जानने के अधिकार के कानून कुचला है। स्टेट बैंक ने सुप्रीम कोर्ट की सत्ता को भी चुनौती देने का प्रयास किया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक संपूर्ण जानकारी स्टेट बैंक द्वारा पूर्व में सरकार द्वारा मांगे जाने पर आनन-फानन में उपलब्ध कराई गई है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने के लिए लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद 30जून का समय मांगा जा रहा है। फिलहाल देश की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है।
लाइव रिपोर्ट: रविश कुमार, यूट्यूब।





















