बिहार से पियूषरंजन सिंह और उत्तर प्रदेश से अनिल उपाध्याय की रिपोर्ट, नजरिया न्यूज, 08मार्च।
बुद्धिजीवियों का एक धड़ा। राज सिंहासन पर किसे और क्यों बैठाया जाए? इस पर विमर्श कर रहा है। लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेई, राजीव गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की तुलना कर रहा है। जिसका लब्बोलुआब इस प्रकार है:
राजा दशरथ सबसे बडे़ पुत्र राम को राज सिंहासन सौंपना चाहते हैं। यह विमर्श का सबसे बड़ा मुद्दा है। मंथरा को कैकेयी के पास गई। कैकेई से कहा:
राजा दशरथ राज सिंहासन पर माता कौशल्या के पुत्र राम को राज सिंहासन पर बैठाना चाहते हैं। आपका तीन वरदान राजा दशरथ के पास उधार है। वह वर मांग लो! भरत को राजगद्दी और राम को 14 वर्ष का वनवास।
आज की मंथरा की चिंता है:
राजा दशरथ संविधान को बदलना चाहते हैं। संविधान बदल गया तो चुनाव नहीं होगा।
राजा दशरथ से वरदान मांगने का यही सबसे उचित समय है।
माता कैकेई को मंथरा की बात में दम लगा। माता कैकेई कोप भवन में चलीं गईं।
राजा दशरथ मनाने गए। माता कैकेई ने कहा: मेरा तीन वरदान उधार है। मैं दो वरदान मांगती हूं। प्रथम: राज सिंहासन पर मेरा पुत्र भरत बैठेगा। दूसरा कौशल्या पुत्र राम को 14वर्ष का वनवास!
रघुकुल रीति सदा चल आई, प्राण जाए पर वचन ना जाई! राजा दशरथ ने रघुकुल रीत की परंपरा का अनुपालन करते हुए माता कैकेई के वरदान को मान लिए।
इसी वरदान के चलते रामराज्य का अभ्युदय हुआ। राक्षसों के वध का मार्ग प्रशस्त हुआ। माता सीता का प्रदुर्भाव हुआ। भरत, राम की पूजा करने लगे। राज सिंहासन पर श्रीराम की चरण पादुका को रखकर अयोध्या में श्रीराम के आगमन तक श्री राम की प्रजा की सेवा करते रहे।
लोकसभा चुनाव 2024से पहले आज की मंथरा को राजा दशरथ की नीयत में खोट दिखाई दे रहा है।
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का लोकसभा में एक भाषण का संपादित अंश:
365दिन चलने वाली पार्टी है। चुनाव के समय कुकुरमुत्ते की तरह खड़ी होने वाली पार्टी नहीं है।यह कोई आकस्मिक जनाधार नहीं है। हमने मेहनत की है। संघर्ष किया है…।देश के भले के लिए एकठ्ठे हो जाएं, चलो स्वागत है। आज हमें अकारण कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। हमें बहुमत मिलना चाहिए। राष्ट्रपति जी ने हमे अवसर प्रदान किया । हमने उसका लाभ उठाने की कोशिश की। हमें सफलता नहीं मिली, वह अलग बात है।
श्रीमती इंदिरा गांधी के लाल किला से दिया गया एक भाषण का संपादित अंश:
देश के 70 प्रतिशत क्षेत्र में दूरदर्शन पहुंचे, वह कार्यक्रम आरंभ होगा । देश में महात्मा गांधी के अलावा भी लाखों लोग थे जिन्होंने अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। उसमें कुछ आज भी हमारे साथ हैं, हम उन सब को याद करते हैं।कुछ लोग कहते हैं, हम लालकिले से वही बातें दोहराते हैं। क्या ऊंचे मूल्य की बातें कभी पुराने हो सकती हैं?
प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का 1965 में दिया गया एक भाषण का संपादित अंश:
सत्य और अहिंसा को हमें अपने आचरण में उतारना है। हम ईमानदारी से अपने काम को करें, वहीं अष्टेय है। हम एक -दूसरे में अंतर नहीं देखें, प्रेम का व्यवहार करें! सत्य अहिंसा, ईमानदारी हमारे धर्म की मूल्यवान चीजें हैं।





















