=कुछ लोग हां कहेंगे और कुछ लोग नहीं कहेंगे – ग्राम प्रधानों के परिवार जनों ने उठाया व्यवस्था पर सवाल
=वित्तीय वर्ष 2020-21 की कार्य योजनाओं को लेकर आवंटित राशि ग्राम प्रधानों ने व्यय किया लेकिन कोई भी कार्य क्यों नहीं हुआ आजतक पूर्ण
= उत्तर प्रदेश के दो ग्राम पंचायतों और बिहार प्रदेश के एक ग्राम पंचायतों से रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश से अनिल उपाध्याय और बिहार से बीरेंद्र चौहान, 05मार्च।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर-जिले के विकास खंड कादीपुर अंतर्गत स्थित ग्राम पंचायत नरोत्तमपुर, विकास खंड करौदीकलां अंतर्गत ग्राम पंचायत खालिसपुर गोपालपुर,जौनपुर जिला अंतर्गत विकास खंड सुइथाकला में स्थित ग्राम पंचायत बिरैली और बिहार प्रदेश में किशनगंज जिला में स्थित पोठिया प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत दामलबाड़ी से भारत सरकार को भेजी गई कार्य योजनाओं की रिपोर्ट का अध्ययन चौंकाने वाला खुलासा कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में सुलतानपुर जिले के विकास खंड करौदीकलां में स्थित ग्राम पंचायत खालिसपुर गोपालपुर में वित्तीय वर्ष 2020-21 में एक करोड़ 03,39,154में 88 लाख, ,68,363रुपये व्यय किया गया है। लेकिन कुल 112 कार्य योजनाओं में सभी की प्रगति शून्य है।
उत्तर प्रदेश के ही सुल्तानपुर जिले में कादीपुर विकास खंड के ग्राम पंचायत नरोत्तमपुर में वित्तीय वर्ष 2020-21में 13लाख 45, 497रुपये में 10लाख 94,592 रुपये व्यय किया गया है। कुल 45कार्य योजनाओं में एक को भी कार्य पूर्ण नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश के ही जौनपुर जिले के विकास खंड सुइथाकला स्थित ग्राम पंचायत बिरैली में वित्तीय वर्ष 2020-21 में 31लाख, 11,839 रुपये में 11लाख, 88,002रुपये व्यय किया गया है। कुल 28कार्य योजनाएं बनाईं गई लेकिन एक भी कार्य योजना आजतक पूर्ण नहीं हुई है।
बिहार प्रदेश के किशनगंज जिला अंतर्गत पोठिया प्रखंड के ग्राम पंचायत दामलबाड़ी में वित्तीय वर्ष 2020-21में 40लाख 38, 813 रुपये में तीन लाख,32,344 रुपये व्यय किया गया है। कुल 40कार्ययोजनाओं में एक भी योजना को पूर्ण नहीं किया गया है।
देश की ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2020-21की राशि में रुपये खर्च होना और तीन-तीन वित्तीय वर्ष में एक भी कार्य पूर्ण नहीं होना बड़ा चौंकाने वाला सवाल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे देश में ग्राम प्रधानों/मुखिया जनों और बीडीओ का एक जैसा संस्कार भी चौंकाने वाला हैं। रुपये खर्च करके और सभी कार्यों को अपूर्ण दिखाने की रिपोर्ट की तरफ भारत सरकार के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह को संज्ञान में लेते हुए वक्तव्य जारी करना चाहिए।





















