“जबतक समाज में जाकर जन चेतना को नहीं बदला जाता है, तब तक किसी बड़े परिवर्तन की उम्मीद बेमानी है.”
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 03मार्च।
राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा कर रहे हैं। इधर बीबीसी से बातचीत में कुशल रणनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा :
आज तक मिले अनुभव के आधार पर उन्हें लगाता है कि महात्मा गांधी का रास्ता आज सबसे अधिक प्रासंगिक है.
उन्होंने कहा, “जब समाज में जाकर जन चेतना को नहीं बदला जाता है, तब तक किसी बड़े परिवर्तन की उम्मीद बेमानी है.”।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जब यात्रा की योजना बनाई गई तो उन्होंने तय किया कि वे लोगों को यह नहीं बताएंगे कि किसको वोट दें और किसको नहीं. वे लोगों को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वोट किस बात के लिए देना चाहिए।.. .
किसी दूसरे कालखंड की तुलना में आज के समय में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता ज़्यादा है.
उन्होंने कहा कि आज शहरी भारत में यह धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है कि महात्मा गांधी की प्रासंगिकता नहीं रह गई है या उनको मानने वालों की संख्या कम हो गई है।
प्रशांत किशोर ने कहा, “2018-19 के दौरान मैंने देश के क़रीब 2,500 कॉलेजों में एक सर्वेक्षण करवाया था। सर्वे के परिणाम से पता चला कि महात्मा गांधी आज भी इस देश में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले सामाजिक-राजनीतिक व्यक्तित्व हैं।
उन्होंने कहा कि आज तक मिले अनुभव के आधार पर उन्हें लगाता है कि महात्मा गांधी का रास्ता आज सबसे अधिक प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, “जब समाज में जाकर जन चेतना को नहीं बदला जाता है, तब तक किसी बड़े परिवर्तन की उम्मीद बेमानी है।
उल्लेखनीय है कि सहनशक्ति ही किसी साधारण व्यक्ति को महात्मा बनाती है। महात्मा गांधी को महात्मा उनकी सहनशक्ति ने बनाई थी। महात्मा बुद्ध को महात्मा उनके त्याग की शक्ति ने बनाई थी। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम उनकी सहनशक्ति ने बनाई थी। महान पुरुषों की राह पर राहुल गांधी चल रहे हैं। उनकी भारत जोड़ो न्याय यात्रा उनको महात्मा गांधी के राह पर ले जाएगी।
कुशल रणनीतिकार प्रशांत किसोर का अनुभव आज के नेताओं को राह दिखाएगा। हिंदी बेल्ट में उभरते जननायक अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव महात्मा गांधी के सपनों का भारत बना सकते हैं। सहनशीलता और सहनशक्ति से महान व्यक्तित्व का निर्माण होता है।





















