1. 14 अगस्त 1976 को मिला वकालत का लाइसेंस
श्री विनोद प्रसाद ने 14 अगस्त 1976 को पटना बार काउंसिल से वकालत का लाइसेंस प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने विधि के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और न्यायिक कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान देना शुरू किया।
2. 20 अगस्त 1976 से अररिया में वकालत शुरू
लाइसेंस मिलने के कुछ ही दिनों बाद 20 अगस्त 1976 को उन्होंने अररिया व्यवहार न्यायालय में वकालत प्रारंभ की। तब से लगातार अररिया न्यायमंडल में विधि सेवा करते हुए उन्होंने पांच दशकों का सफर पूरा किया है।
3. ईमानदारी और समर्पण बनी पहचान
लंबे विधि सेवा काल के दौरान उनकी पहचान एक अनुभवी, ईमानदार और समर्पित अधिवक्ता के रूप में बनी। कानून के प्रति उनकी निष्ठा और न्याय के लिए कार्य करने का जज्बा अधिवक्ता समुदाय के लिए प्रेरणादायक माना जाता है।
4. युवा अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत
विनोद प्रसाद की 50 वर्षों की विधि सेवा नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं के लिए अनुभव और प्रेरणा का स्रोत है। गोल्डन जुबली के इस अवसर पर अधिवक्ता समुदाय ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके दीर्घायु जीवन की कामना की।


















