- रील बनाने की सनक बनी जानलेवा, कोसी की तेज धार में बहा 28 वर्षीय युवक
- कोसी बराज की रेलिंग के पास रील बनाने के दौरान फिसला पैर, देखते ही देखते आंखों के सामने पानी में समा गया संजीत; शव की तलाश जारी।
नजरिया न्यूज़,नरपतगंज/भीमनगर। सावन की तीसरी सोमवारी पर जल भरने को लेकर दोस्तों के साथ कोसी बराज पहुंचे एक युवक की रील बनाने की कोशिश जानलेवा साबित हो गई। रविवार की शाम भीमनगर कोसी बराज में रेलिंग के समीप रील बनाने के दौरान 28 वर्षीय संजीत कुमार शर्मा का अचानक पैर फिसल गया और वह पानी की तेज धार में जा गिरा। देखते ही देखते युवक तेज बहाव के साथ बह गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में कोहराम मच गया।
जानकारी के अनुसार, नरपतगंज प्रखंड के फुलकाहा थाना क्षेत्र अंतर्गत अंचरा वार्ड संख्या सात निवासी संजीत कुमार शर्मा, पिता अरुण शर्मा, रविवार शाम अपने कुछ साथियों के साथ सावन की तीसरी सोमवारी के अवसर पर जल भरने के लिए सुपौल जिले के भीमनगर कोसी बराज पहुंचा था।
बताया जा रहा है कि बराज के समीप घूमने के दौरान संजीत रेलिंग के पास खड़ा होकर मोबाइल से रील बना रहा था। इसी बीच अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और पैर फिसलने से वह सीधे कोसी की तेज धारा में जा गिरा। साथ मौजूद दोस्तों ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि संजीत कुछ ही पलों में आंखों से ओझल हो गया।
हादसे के बाद मचा कोहराम
युवक के नदी में बहने की खबर मिलते ही परिजनों और गांव में मातम पसर गया। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर युवक की तलाश शुरू की गई। नदी की तेज धार और बराज के आसपास पानी के बहाव के कारण तलाश अभियान में परेशानी आ रही है। फिलहाल संजीत के शव की तलाश जारी है।
एक पल की रील, जिंदगी भर का गम
घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर रील बनाने के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनोरंजन और वीडियो बनाने की कोशिश में लोग अक्सर खतरनाक स्थानों तक पहुंच जाते हैं, जहां जरा-सी चूक जान पर भारी पड़ सकती है। संजीत के मामले में भी कुछ सेकंड की रील के लिए उठाया गया जोखिम परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया।
समय रहते मदद मिलती तो शायद बच जाती जान!
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों और कांवरियों ने बचाव के लिए मदद की गुहार लगाई। लोगों का कहना है कि यदि बराज पर तैनात सुरक्षा जवान और प्रशासनिक अमला तत्काल सक्रिय होकर प्रभावी बचाव अभियान शुरू करता, तो शायद संजीत को बचाने की संभावना बन सकती थी। हालांकि, यह भी स्पष्ट नहीं है कि हादसे के बाद बचाव दल कितनी देर में सक्रिय हुआ और उस समय बराज पर क्या-क्या सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे।
रात में मदद मांगने पहुंचे कांवरियों ने लगाया गंभीर आरोप
घटना के बाद रात में कुछ कांवरिया प्रशासन से मदद मांगने पहुंचे। कांवरियों का आरोप है कि उनकी सहायता करने के बजाय उन्हें लाठी-डंडे से खदेड़ दिया गया। इस घटना से आक्रोशित कांवरियों ने सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन भी किया। कांवरियों के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यदि आरोप सही हैं तो यह पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।
प्रशासन की तैयारी पर उठे सवाल
सावन की सोमवारी के मौके पर कोसी बराज जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना पहले से रहती है। ऐसे में सुरक्षा, बैरिकेडिंग, निगरानी और तत्काल बचाव व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले से पूरी तरह अलर्ट रहता और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो शायद आज यह दुखद दिन देखने को नहीं मिलता।
शव की तलाश जारी, परिवार में मातम
घटना के बाद संजीत के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। नदी की तेज धार और गहराई के कारण शव की तलाश में मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर युवक की तलाश जारी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कोसी बराज जैसे संवेदनशील स्थल पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम थे? अगर थे, तो हादसे के बाद बचाव में देरी क्यों हुई? और कांवरियों द्वारा लगाए गए लाठी-डंडे से भगाने के आरोपों की जांच कब होगी? इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
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