प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार 3 अगस्त 2026 की सुबह करीब 11 बजे एसएसबी की बी कंपनी, डूबाटोला अंतर्गत आमगाछी सीमा चौकी के जवान नियमित गश्ती पर थे। गश्ती दल का नेतृत्व एएसआई (जीडी) लालनुन माविया कर रहे थे। इसी दौरान सीमा स्तंभ संख्या-174 के समीप भारतीय सीमा में लगभग 20 मीटर अंदर सोनामनी गोदाम क्षेत्र में नेपाल की ओर से आ रहे दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोककर पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान दोनों ने अपनी पहचान रहमत अली (43 वर्ष), पिता अब्दुल बरेक तथा मो. जमाल हसन जिहाद (22 वर्ष), पिता मो. जमाल हुसैन मोल्ला, दोनों निवासी बिटारा, कचुआ, जिला चांदपुर, बांग्लादेश के रूप में बताई। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों के पास भारत में प्रवेश के लिए आवश्यक वैध पासपोर्ट और वीजा नहीं था।
प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने एसएसबी अधिकारियों को बताया कि वे नेपाल की राजधानी काठमांडू से भारत में प्रवेश कर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी कॉरिडोर तथा असम-बांग्लादेश सीमा के रास्ते अपने देश लौटने की योजना बना रहे थे। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां उनके इस दावे की भी जांच कर रही हैं और भारत आने के वास्तविक उद्देश्य का पता लगाने में जुटी हैं।
56वीं वाहिनी एसएसबी बथनाहा के द्वितीय कमान अधिकारी सह कमांडिंग अधिकारी नितिन गुप्ता ने बताया कि नियमित गश्ती के दौरान संदेह के आधार पर दोनों व्यक्तियों को रोका गया। पूछताछ में उनके बांग्लादेशी नागरिक होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोनों विदेशी नागरिकों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए सोनामनी गोदाम थाना के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
वहीं, अररिया के एसडीपीओ सुशील कुमार ने भी दो बांग्लादेशी नागरिकों के पकड़े जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों से पूछताछ जारी है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दोनों किन परिस्थितियों में नेपाल से भारत में प्रवेश किए और उनके आने का वास्तविक उद्देश्य क्या था। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एसएसबी की सतर्कता से हुई इस कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






















