- बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर जिले में युद्धस्तर पर तैयारी शुरू
- पंचायत भवनों में बनेंगे विधिक सहायता केंद्र, पारा-लीगल वालंटियर देंगे निःशुल्क परामर्श
- डीएलएसए सचिव रोहित श्रीवास्तव ने पदाधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, हर सप्ताह मांगी जाएगी प्रगति रिपोर्ट
नजरिया न्यूज़ , रूबी विनीत, अररिया।
गांव के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और कानूनी जागरूकता पहुंचाने के संकल्प के साथ बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर अररिया जिले में ऐतिहासिक पहल शुरू होने जा रही है।
जिले की सभी पंचायतों में 15 अगस्त 2026, स्वतंत्रता दिवस से पूर्व विधिक सहायता केंद्र की स्थापना कर दी जाएगी। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके घर के पास ही निःशुल्क विधिक सलाह, जानकारी और सहायता उपलब्ध होगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए गुरुवार दिनांक 30.07.2026 को अपराहन 12:30 बजे एसीजेएम सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार अररिया श्री रोहित श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जिला कार्यालय प्रकोष्ठ में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिला पंचायत राज पदाधिकारी श्री मनीष कुमार के साथ-साथ फारबिसगंज प्रखंड के पंचायत राज पदाधिकारी श्री शशि रंजन कुमार, पलासी प्रखंड के पंचायत राज पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार, रानीगंज प्रखंड की पंचायत राज पदाधिकारी सुश्री प्रियंका कुमारी एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित थे।
बैठक को संबोधित करते हुए डीएलएसए सचिव श्री रोहित श्रीवास्तव ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार का स्पष्ट निर्देश है कि न्याय व्यवस्था को अंतिम व्यक्ति तक ले जाया जाए। इसी उद्देश्य से प्रत्येक पंचायत में विधिक सहायता केंद्र खोले जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से आम नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों, संवैधानिक अधिकारों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, भूमि विवाद, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, महिला एवं बाल अधिकार, श्रम कानून, वृद्धजन एवं दिव्यांग अधिकार* आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक विधिक सहायता केंद्र पर प्रशिक्षित पारा-लीगल वालंटियर की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। साथ ही आवश्यकता के अनुसार पैनल अधिवक्ता भी निश्चित अंतराल पर केंद्र पर उपस्थित होकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और निःशुल्क विधिक परामर्श देंगे। यदि किसी मामले में न्यायालय जाने की आवश्यकता होगी तो जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से निःशुल्क अधिवक्ता भी उपलब्ध कराया जाएगा।
सचिव ने सभी प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों को 15 अगस्त की समय-सीमा के अंदर कार्य पूर्ण करने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन या अन्य उपयुक्त सार्वजनिक स्थान को चिन्हित कर वहां केंद्र स्थापित किया जाए। केंद्र में बैठने की व्यवस्था, सूचना पट्ट, बैनर, पोस्टर एवं आवश्यक स्टेशनरी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह योजना राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकता है। कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही पर संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि केंद्रों के उद्घाटन के साथ ही पंचायत स्तर पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लोगों को इन केंद्रों की जानकारी दी जाएगी। डीएलएसए सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक केंद्र पर आने वाले लाभार्थियों की संख्या, पूछे गए प्रश्नों और निष्पादित मामलों का ब्योरा रखते हुए उसकी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय को भेजी जाए।
बैठक के अंत में पारा-लीगल वालंटियर के प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार की रणनीति और केंद्रों के सुचारू संचालन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने 15 अगस्त से पूर्व सभी पंचायतों में केंद्र स्थापित करने का आश्वासन दिया।
डीएलएसए ने आम जनता से अपील की है कि वे इन केंद्रों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपनी विधिक समस्याओं के समाधान के लिए निःसंकोच केंद्रों पर संपर्क करें।






















