नजरिया न्यूज, फारबिसगंज, 06 मई 2026।
जिले के फारबिसगंज अनुमंडल स्थित रुंगटा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (RITM), फारबिसगंज परिसर में आज स्वामी महेश्वरानंद जी महाराज का आगमन हुआ।
रामकृष्ण मिशन, कटिहार के सचिव स्वामी महेश्वरानंद जी महाराज ने अपने इस दौरे के दौरान संस्थान में चल रहे शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं आधारभूत संरचना विकास कार्यों का विस्तृत अवलोकन किया।
उन्होंने स्मार्ट क्लासरूम, निर्माणाधीन प्रयोगशालाओं, आधुनिक कंप्यूटर लैब, डिजिटाइज्ड पुस्तकालय तथा इंजीनियरिंग वर्कशॉप्स के विकास कार्यों की प्रगति को देखा और संस्थान द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की।
स्वामी जी ने परिसर के अनुशासित वातावरण, सकारात्मक शैक्षणिक माहौल एवं संस्थान की दूरदर्शी योजनाओं पर संतोष व्यक्त किया। अपने आशीर्वचन में उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मविकास एवं समाज के समग्र उत्थान का आधार है।
उन्होंने संस्थान परिवार को समर्पण, अनुशासन एवं सेवा भाव के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष बल दिया।
इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य डॉ. राशिद हुसैन, MDMS के निदेशक डॉ. संजय प्रधान सहित अन्य पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों ने उनका हार्दिक स्वागत किया एवं संस्थान की वर्तमान गतिविधियों, शैक्षणिक योजनाओं तथा आधारभूत संरचना के विस्तार से संबंधित कार्यों की जानकारी साझा की।
संस्थान के चेयरमैन महाबीर प्रसाद रुंगटा ने अपने वक्तव्य में कहा:
“RITM का उद्देश्य सीमांचल के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करना है। हम आधुनिक तकनीकी संसाधनों, अनुभवी संकाय एवं सुदृढ़ शैक्षणिक ढांचे के माध्यम से विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान आने वाले समय में तकनीकी, प्रबंधन एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे सीमांचल के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही उच्चस्तरीय शिक्षा उपलब्ध हो सके।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी शिक्षकों एवं कर्मियों ने स्वामी जी के मार्गदर्शन को प्रेरणास्रोत बताते हुए संस्थान की गुणवत्ता उन्नयन हेतु समर्पित रहने का संकल्प दोहराया।
स्वामी महेश्वरानंद जी महाराज के आगमन से संस्थान परिवार में उत्साह एवं नई ऊर्जा का संचार हुआ। उनका यह प्रेरणादायक भ्रमण न केवल संस्थान के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हुआ, बल्कि सीमांचल क्षेत्र में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता, आत्मनिर्भरता एवं सकारात्मक परिवर्तन का भी प्रतीक बनकर उभरा।



















