अरुण सिंह संवाददाता नजरिया न्यूज लखनऊ 24फरवरी।
निवर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार में नौकरशाही बेलगाम थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में नौकरशाही समय काटने की उस्ताद है। अखिलेश यादव सरकार की नौकरशाही महाभ्रष्ट थी। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की नौकरशाही महाभ्रष्टाचार के शिकार हुए पीड़ितों के मामलों में टालमटोल कर रही है।समय को काटते हुए नौकरी को बचाने में सफल हो रहे हैं। एक उदाहरण दोनों सरकारों के नौकरशाही को परखने के लिए पर्याप्त होना चाहिए।
संस्कृत कालेज जौनपुर के प्रबंधक ब्रह्मजीत कहते हैं वर्ष 2006में संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पुनर्पंजीयन 1983से किया गया। यह जानकारी संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी व डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय वाराणसी से 2013में मालूम होते ही मैंने संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के नवीनीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी के कार्यालय में जमा करा दिया।
वहां से जानकारी दी गई कि 1946से पंजीकृत संस्था संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पुनर्पंजीयन करा लिया गया है।
संस्कृत कालेज प्रबंधक ब्रह्मजीत सिंह ने कहा कि उक्त मामले की चुनौती मैंने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर करके दी।
वर्ष 2013 माननीय न्यायमूर्ति इलाहाबाद ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कानून के अनुसार निर्णय करने का आदेश डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी को दिया।
डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी सुभाष सिंह ने प्रतिवादी और मुझे नोटिस जारी किया: किस परिस्थिति में पुरानी संस्था का पुनर्मूल्यांकन किया गया। अन्यथा पुनर्पूंजीकरण रद कर दिया जाएगा। मुझे कहा गया कि 2010-11 से नवीनीकरण प्रमाणपत्र के लिए साक्ष्य उपलब्ध कराएं।
संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के प्रबंधक ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि उक्त नोटिस के बाद शिक्षा माफिया लाबी ने नोटिस जारी करने वाले डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी सुभाष सिंह का वाराणसी से तबादला करा दिया। नये डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह ने संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर के वजूद के सारे डाक्यूमेंट को फर्जी बताते हुए प्रतिवादी के पक्ष में 2014 में फैंसला सुना दिया।
वर्तमान डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी का कहना है कि मुझे शासन से निदेश चाहिए।
उक्त तथ्य यह बताने के लिए काफी है कि अखिलेश यादव की सरकार में नौकरशाही ईमानदार अधिकारियों का तबादला करके गैरकानूनी कार्य करवाती थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की नौकरशाही काम को टालने में विश्वास करती है। अन्यथा वर्तमान डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी शासन के संज्ञान में संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पूरा मामला लाते हुए निदेश ले सकते हैं।
फिलहाल, राज्य सूचना आयुक्त लखनऊ के न्यायालय में 1975से 1983के बीच प्रबंधक कौन था और संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर का पुनर्जीयन कराने का आवेदन किसने दिया था का उत्तर महाभ्रष्ट अधिकारी की पोल खोल देगा।
फोटो कैप्शन
भ्रष्टाचार – संस्कृत महाविद्यालय पट्टी नरेंद्रपुर प्रबंध कार्यकारिणी को 2006 में पहली बार जारी नवीनीकरण प्रमाणपत्र। 1983और 2005 के बीच के नवीनीकरण प्रमाणपत्र प्रबंधक सतीश त्रिपाठी तथा 1932से 1982के बीच का नवीनीकरण प्रमाणपत्र बोगस प्रबंधक कृष्णदेव त्रिपाठी ने डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी कार्यालय में आख्या प्रस्तुत करते समय नहीं उपलब्ध करा सके हैं: विवेचना
डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी द्वारा जारी 1976-77 में नवीनीकरण प्रमाणपत्र जिसमें संस्कृत कालेज पट्टी नरेंद्रपुर जौनपुर की प्रबन्धकारिणी सूची में भानु प्रताप सिंह प्रबंधक हैं। इस प्रकार का प्रमाण पत्र 1646 से डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी के कार्यालय में मौजूद हैं जिसमें भानु प्रताप सिंह प्रबंधक हैं। इसके बावजूद शिक्षा माफिया लाबी से प्रभावित 2014के डिप्टी रजिस्ट्रार वाराणसी मनोज सिंह ने बोगस प्रबंधक के पक्ष में फैंसला सुनाया है- *विवेचना























