कुशेश्वरस्थान |
केवटगामा पंचायत के पछियारी रही गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्रसिद्ध कथा वाचक नीतीश शास्त्री जी ने कहा कि श्रीराम कथा विश्व कल्याणदायनी और लोक मंगलकारी है। प्रभु श्रीराम के आचरण और व्यवहार को अपनाने से मानव जीवन आनंदमय हो जाता है।
पारिवारिक मूल्यों की सीख
कथा के दौरान शास्त्री जी ने कहा कि श्रीराम कथा के माध्यम से मानव जीवन में पारिवारिक संबंधों के महत्व को स्थापित किया गया है। रामचरितमानस में गुरु, माता-पिता, पुत्र-पुत्री, भाई-बहन, पति-पत्नी और मित्रों के प्रति कर्तव्य बोध और सदाचार की सीख सर्वत्र मिलती है।
श्रद्धा और व्यवहार से ईश्वर से जुड़ाव
उन्होंने कहा कि परमात्मा से जुड़ने का सबसे बड़ा साधन श्रद्धा और व्यवहार है। श्रीराम कथा का श्रवण करने से मन का शुद्धिकरण होता है, संशय दूर होता है और मन को शांति एवं मुक्ति की अनुभूति होती है।
हनुमान चरित्र से लेने की सीख
कथा व्यास ने कहा कि यदि भगवान श्रीराम का प्रिय बनना है तो हनुमान जी के चरित्र से सीख लेनी होगी। उनका समर्पण, सेवा भाव और निष्ठा प्रत्येक भक्त के लिए आदर्श है।
प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन
कथा के क्रम में शास्त्री जी ने किशोरी जी के प्रादुर्भाव, जनकपुरी में माता सीता के जन्मोत्सव, प्रभु श्रीराम के मिथिला आगमन तथा यज्ञ नारायण भगवान की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यज्ञ नारायण की कृपा से ही धार्मिक आयोजनों के माध्यम से गांव और समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।
भजन-कीर्तन से श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध
श्रीराम कथा के दौरान बीच-बीच में प्रसंग आधारित संगीतमय भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए गए, जिससे पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।























