बीरेंद्र पांडेय, शिक्षा संवाददाता किशनगंज, 9फरवरी।
किशनगंज जिले के अर्राबाड़ी स्थित पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय में 9 फरवरी को एक स्वास्थ्य और स्थायी भविष्य के लिए पशु चिकित्सा, मत्स्य पालन, कृषि और डेयरी में तालमेल विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. इंद्रजीत सिंह, कुलपति, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर कियाI सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ़ फार्म एंड कम्पैनियन एनिमल्स के तृतीय संस्करण के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि डॉ. एस. बेंजाकुल, निदेशक और प्रोफेसर, आईसीई-एसएसआई, थाईलैंड, विशेष अतिथि डॉ. कमलेश उपाध्याय, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, बीजे मेडिकल कॉलेज और सिविल हॉस्पिटल, अहमदाबाद, गुजरात, डॉ. चंद्रहास, सम्मेलन अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, डॉ. जे.के. प्रसाद, अध्यक्ष, एसपीएफसीए एवं अधिष्ठाता, बिहार पशुचिकित्सा महाविद्यालय, पटना, डॉ. वी. पी. सैनी, सह-अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, मत्सयिकी महाविद्यालय एवं डॉ विनोद कुमार, आयोजन सचिव की गरिमामयी उपस्थिति रहीI
अपने उद्घाटन संबोधन में मुख्य अतिथि डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में “वन हेल्थ” की अवधारणा अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि मानव, पशु एवं पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पशु रोगों की रोकथाम, जैव सुरक्षा उपायों एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों को अपनाकर न केवल पशुधन उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है, बल्कि मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण को भी सुदृढ़ किया जा सकता है। शोधार्थियों एवं युवा वैज्ञानिकों को बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाने और नवाचार के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का आह्वान किया।
किशनगंज, बिहार – राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने आधी खेती और आधी बारी पर दिया जोर-बीरेंद्र पांडेय, शिक्षा संवाददाता किशनगंज
विशिष्ट अतिथि डॉ. एस. बेंजाकुल ने बहु-क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पशुचिकित्सा, मत्स्य, डेयरी एवं कृषि क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित करना समय की मांग है। उन्होंने सतत उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने तथा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसे उभरते मुद्दों पर संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
विशेष अतिथि डॉ. कमलेश उपाध्याय ने अपने प्रेरक संबोधन में वन हेल्थ की अवधारणा को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताया। उन्होंने सतत उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य एवं पशुपालन क्षेत्रों के बीच सहयोगात्मक मॉडल विकसित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के शुभारंभ में डॉ. चंद्रहास ने समारोह में आए हुए अतिथियों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों, किसानों, छात्रों गणमान्य व्यक्तियों एवं मीडिया कर्मियों का स्वागत कियाI कार्यक्रमकी विस्तृत रूपरेखा को बताते हुए डॉ चंद्रहास ने बताया कि छह अलग-अलग विषयों यथा वन हेल्थ के माध्यम से सतत सामाजिक विकास, सतत भविष्य के लिए उन्नत पशुचिकित्सा पद्धतियाँ, सतत मत्स्य एवं जलीय कृषि, सतत पशुधन एवं डेयरी प्रबंधन, सतत खाद्य प्रणाली एवं खाद्य सुरक्षा और जलवायु-अनुकूल कृषि के ऊपर चर्चा की जानी हैI डॉ. जे.के. प्रसाद, अध्यक्ष, एसपीएफसीए अपने संबोधन में राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन पर आयोजनकर्ताओं को बधाई दी एवं इसके सफल आयोजन की शुभकामनाएं व्यक्त की एवं उम्मीद व्यक्त कि की संगोष्ठी से संबंधित विचार विमर्श नई तकनीक के विकास करने एवं एक स्वास्थ्य और स्थायी भविष्य के लिए सहयोगी सिद्ध होगीI आयोजन सचिव डॉ विनोद कुमार ने बताया की इस अवसर पर स्टॉल एवं प्रदर्शनी के माध्यम से संस्थाएं एवं कंपनियों अपने नवीन उत्पाद एवं सेवाओं का प्रदर्शन करेंगेI साथ ही साथ “अकादमिक–किसान–उद्योग संवाद सत्र का भी आयोजन किया जाएगाI डॉ विनोद कुमार ने देश के विभिन्न हिस्सो से आए हुए प्रतिभागियों, वैज्ञानिकों, छात्रों एवं किसानों का धन्यवाद ज्ञापन कियाI























